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Showing posts from June, 2020

देवशयनी एकादशी-हरिश्यन से रुक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य  

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        देवशयनी एकादशी-हरिश्यन से रुक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य         आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी देवशयनी एकादशी के रुप में मनाई जाती है. देवशयनी एकादशी, देवताओं के शयन का समय, यह वो समय है जब भगवान श्री विष्णु एक लम्बे समय के लिए क्षीर सागर में शयन करते हैं. चार माह के लिए भगवान विष्णु के शयन के साथ ही सभी शुभ एवं मांगलिक आयोजन रुक जाते हैं.         इस बार देवशयनी एकादशी 1 july 2020 को है. देवशयनी एकादशी के बाद चार महीने तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है।        देवशयनी एकादशी व्रत करने और इस दिन भगवान श्रीहरि की विधिवत पूजन से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं. देवशयनी एकादशी के बाद शरीर और मन तक नवीन हो जाता है.        देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस एकादशी के अवसर पर स्थान-स्थान पर धार्मिक कार्यों पूजा पाठ इत्यादि का आयोजन किया जाता है.   देवशयनी एकादशी व्रत      इस एकादशी के समय पर व्रत एवं उपवास इत्यादि का पालन किया जाता है. इसी दिन से चातुर्मास का भी आरंभ होता है जो आने वाले

जन्म कुण्डली में 12 भावों में चंद्रमा और आप

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चंद्रमा का 12 भावों में प्रभाव           नवग्रहों में चन्द्रमा का होना जीवन शक्ति के होने जैसा है. यही वह ग्रह है जो जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रभावित करने कि क्षमता रखता है. इसका कारण इसकी तीव्र गति और सभी ग्रहों से सबसे ज्यादा तेज होना भी है. अन्य सभी ग्रह 1 माह से लेकर ढाई साल के करीब का समय लेते हैं अपने भ्रमण में पर केवल चंद्रमा ही एक ऎसा ग्रह हो जो सबसे अधिक तीव्र और जल्द फल देने में सक्षम होता है. चंद्रमा का कुंडली में किसी भी स्थान में होना उसकी ऊर्जा का उस स्थान पर होने से होता है. चंद्रमा के अंदर वो शक्ति है जो जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रभावित करने वाली होति है. इसी से जीवन को जीने की शक्ति मिलती है.         Ist House- पहले घर में बैठा चंद्रमा जातक को चमत्कारिक रुप से भावना प्रधान बना सकता है. अस्थिरता और अनिश्चितता उस पर रहती है, लेकिन जनून भी बहुत होता है. खुद को लेकर एक अलग तरह कि सोच उस पर अपना असर जरूर डालती है. कला के प्रति दिलचस्पी भी बनती है.  सुख को पाने की इच्छा रखने वाला, चंचलता युक्त होता है.       2nd House -दूसरे घर में बैठा चंद्रमा कुछ धीर गंभीर, संभल

जन्म कुण्डली में ग्रह अनुकूल नहीं है तो ग्रह आपके शरीर पर डाल सकता है गहरा प्रभाव   

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  जन्म कुण्डली में ग्रह अनुकूल नहीं है तो ग्रह आपके शरीर पर डाल सकता है गहरा प्रभाव         ज्योतिष शास्त्र में, ग्रह शरीर के किसी न किसी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं. अगर जन्म कुण्डली में ग्रह अनुकूल नहीं है और गोचर में भी प्रतिकूल स्थिति बनी हुइ है ग्रह की तो उस समय के दौरान, व्यक्ति को कुछ न कुछ स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, जिसे ग्रह द्वारा दर्शाया जाता है.  ग्रहों के अपने-अपने कारक तत्वों के आधार पर उनके विशेष फलों की प्राप्ति होती है. सभी नौ ग्रह किसी न किसी रुप से अपने गुणों को दर्शाते हैं. इन सभी नव ग्रहों की स्थिति शुभ और अशुभ फलों को देने वाली बनती है. कालपुरुष की कुंडली        ज्योतिष में कुंडली के बारह भाव काल पुरूष की कुंडली कहे जाते हैं. ज्योतिष के लिहाज काल पुरूष की कुंडली व्यक्ति के शरीर के सभी अंगों पर अपना असर डालने वाली होती है. काल पुरुष की कुंडली में प्रत्येक अंग का अधिकार किसी न किसी ग्रह से भी प्रभावित होता है.  सूर्य ग्रह       सूर्य का असर हड्डियों, आंख, हृदय, सिर और जोड़ों पर अपना प्रभाव रखता  है. सूर्य की दशा के दौरान जातक को उसके द्व

30 जून मंगलवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

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कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष   https://savarkartimes.page/article/kaise-gyaat-karen-apana-shubh-moolaank-ank-jyotish/jJr5Om.html   30 जून मंगलवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन 1 आपसी रिश्तों में थोड़ा तनाव होना परेशान कर सकता है. मौसम का प्रभाव आप पर भी होगा. कुछ बाहरी बातें आपको इस समय सोच में डाल सकती हैं.  2 अभी आपको कुछ नए काम सिखने का मौका मिल सकता है. जो भी बात या व्यक्ति आपके जीवन में गैर जरूरी है, उसे खुद से दूर रखना आपके अच्छा होगा. ज्यादा सोचें नही अपनी मेहनत को करते रहें.  3 आपके विरोधी स्वयं ही आपसे दूर होने लगेंगे. पर आज का दिन आप अपने जीवन साथी के साथ कुछ कारणों से तनाव का शिकार हो सकते हैं.. कारोबार में मिलेजुले प्रभाव दिखाई देंगे.  4 अपने आप को इमोशन से परे रखें वर्ना मानसिक तनाव अधिक पड़ सकता है. कुछ बातें आपको भावनात्मक जुड़ाव से दूर रहने में और बाहर निकलने में आपके लिए सहायक बनेंगी.  5 आपका मन  गूढ़ विषयों को जानने में रुचि रख सकता है. कुछ नयी चीजों को जानने का मौका भी मिलेगा. नौकरी में सह कर्मियों के साथ बात अधिक न

29 जून सोमवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

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29 जून सोमवार  1 अगर कहीं कुछ कमी रह रही है तो आपको चाहिए की उसे पूरा करें. वर्ना दूसरे लोग इसका लाभ उठा लेंगे. किसी अंजान व्यक्ति का संपर्क नयी बातें सिखा सकता है.  2 परिश्रम करने की जरूरत है जिससे आप सही दिशा प्राप्त हो सके. आपको माता कि ओर से कुछ रोक टोक सुनने को मिल सकती है. कही बाहर जाने पर सावधानी से काम करना होगा.  3 दोस्तों को साथ लेकर आज आप आगे बढ़ सकेंगे ओर अपने काम को पूरा कर पाएंगे. आपको अपने प्रोफेशन और पारिवारिक रिश्तों को समझने में भी किसी की मदद काम आ सकती है.  4 घरेलू क्षेत्र में आप अपने परिवार की सहायता करने में लगे होंगे. पर काम के चलते ज्यादा न कर पाएं. कुछ काम बीच में रुक सकते हैं.  5 प्रोपर्टी और बाहरी संपर्क से लाभ प्राप्ति की संभवना है. प्रोफेशनल्स को यह समय शोध कार्य करने में, लग सकता है पर उच्च अधिकारियों से ज्यादा सहायता न मिल पाए.  6 अपने अभ्यास में, लगे रहना होगा. आपके लिए मित्र और कोई संबंधी काम का हो सकता है. अपने कौशल को बढ़ाने में अप तकनीक का सहारा भी ले सकते हैं.  7 अपने गुप्त शत्रुओं से बचें वे आपके काम को रुकवाने का खूब प्रयास करेंगे. बा

नेत्रपाणि अवस्था अर्थात नेत्रों पर हाथ रखे हुए अवस्था

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नेत्रपाणि अवस्था अर्थात नेत्रों पर हाथ रखे हुए अवस्था  सूर्य -सूर्य नेत्रपाणि अवस्था में होने से जातक सदा सुखी, ज्ञानी, परोपकारी, पुष्ट शरीर वाला, सुखी और राज्यकुल से विशेष आदर पानेवाला होता है.  चन्द्र- नेत्रपाणि अवस्था में जातक रोगी, अत्यन्त झूठ बोलने वाला, धूर्त तथा सदा कुकर्म करने वाला होता है.  मंगल- यदि मंगल नेत्रपाणि अवस्था में लग्न में हो तो उस जातक को दरिद्रता सताती है, यदि उक्त अवस्थागत दूसरे भाव में हो तो वह शहर का मालिक अर्थात धनवान होता है. बुध-नेत्रपाणि अवस्था में जातक विद्या और बुद्धि से हीन होता है, किसी के साथ सद व्यवहार नहीं करता और मिथ्याभिमानि रहता है. यदि उक्त अवस्थागत बुध पांचवें भाव में हो तो पुत्र और स्त्री का सुख नहीं मिलता, कन्या विशेष पैदा होती है और वह पुरुष राजकुल में पंडित तथा आदरणीय होता है.  गुरु -नेत्रपाणि अवस्था में जातक रोगी रहता है, बड़प्पन और संपत्ति से हीन होता है, नाच-गान में विशेष प्रेम रखता है, सदा गौरन्ग रहता है और कुलहीन स्त्री से प्रेम रखता है. शुक्र -नेत्रपाणि अवस्था में यदि शुक्र लग्न, सातवें या दस्वें भाव में हो तो उस मनुष्य को आंखों क

कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष

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कैसे ज्ञात करें अपना शुभ अं क             मूलांक से फलादेश के लिए आपके शुभ अंक का पता जन्मतिथि के अनुसार लगाया जाता है. जिस तिथि को जन्म हुआ हो उसके अंकों का योग मूलांक कहलाता है.     1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 अंकों के स्वामी नौ ग्रह क्रमश: सूर्य, चन्द्र, गुरु, राहू, बुध, शुक्र, केतु, शनि और मंगल हैं. यदि आपकी जन्मतिथि दो अंकों की है तो दोनों का योग करके संख्या निकाले, उदाहरण के  लिए यदि आपकी जन्म तारीख 23 है तो आपका मूलांक 2 +3 =5 होगा. जिसका स्वामी बुध होगा. ऐसे ही 1 से 31 तक जन्मे जातक अपने मूलांक और ग्रह को जान लें.  1 अंक के स्वामी ग्रह – 1 अंक के स्वामी सूर्य ग्रह हैं. जिन जातकों का जन्म 01, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है उनका मूलांक 1 होता है.  2 अंक के स्वामी ग्रह – 2 अंक के स्वामी चंद्रमा हैं. जिन जातकों का जन्म 02, 11, 20 या 29 तिथि को हुआ है उनका मूलांक 2 बनता है. 3 अंक के स्वामी ग्रह – 2 अंक के स्वामी बृहस्पति हैं.  जो जातक 03, 12, 21 या 30 तारीख को जन्मे हैं, उनका मूलांक 3 है. 4 अंक के स्वामी ग्रह – 4 अंक के स्वामी राहू हैं.  जिन जातकों का जन्म 04, 13, 22 या 31 तारीख

28 जून रविवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

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28 जून रविवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन      अंक ज्योतिष में 1 से लेकर 9 तक नौ ग्रहों को प्रतिनिधित्व करते हैं. तो आइये जानते हैं आपके भाग्यांक अंक आज का मूलांक फल    1       अपनी भावनाओं को लेकर आज आप कन्फ्यूजन में होंगे. कुछ समय आप अगर अपनी पसंद के कामों में लगाते हैं तो आपके लिए अच्छा होगा.  2      आपके लिए ये समय अनिश्चिता की ओर संकेत कर रहा है.आप अपनी बोल चाल से दूसरों को परेशान कर सकते हैं. इसलिए आज सोच समझ कर बात करें तो बेहतर होगा.   3      आप थोड़ी बेचैनी और चिंता महसूस कर सकते हैं अपने आने वाले समय या कहें भविष्य को लेकर थोड़ी बहुत आशंकाएं भी मन में घर कर सकती हैं. किसी के साथ उलझें नहीं. 4      आप के लिए आज का दिन चीज़ों को बड़ा कर दिखाने का होगा.  इसलिए हो सकता है जो भी परिवर्तन आएं वो शुरू में आप के लिए ज्यादा बेहतर न हों पर जल्दी आपके पक्ष में होंगे,.  5    आपको यह समझना होगा यह समय आपके लिए हो सकता है बस आपको खुद को उसके लिए साबित करने की जरूरत होगी. आज किसी के साथ वादा न करें और अपने धन का भी ध्यान रखें.  6     लोग आप पर आक्षेप लगा

27 जून शनिवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

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       अंक ज्योतिष में 1 से लेकर 9 तक नौ ग्रहों को प्रतिनिधित्व करते हैं. तो आइये जानते हैं आपके भाग्यांक अंक आज का मूलांक फल  27 जून शनिवार  सूर्य -1       आज का दिन आप थोड़े मनमौज में अधिक रहने वाले हैं. आप को अपने काम को लेकर भी संजीदा दिखाई देंगे. जो भी समय है उसमें कुछ वक्त परिवार को दें समस्याएं हल होंगी.  चन्द्र-2 आपके लिए आज का दिन ज्यादा बेहतर न हो पर कुछ मामलों में नई चीजों से जुड़ाने वाला होगा. दोस्तों को लेकर आप थोड़ा ज्यादा ही गंभीर भी दिखाई दे सकते हैं.  गुरु-3 आपके लिए आने वाला दिन काम में उलझनों को बढ़ाने वाला हो सकता है. दोपहर बाद कुछ अच्छा समय शुरू हो सकता है. गृह क्लेश दूर होंगे और पारिवारिक शांति बनेगी.    राहू-4 इस दौरान आप ज़रूरतमंद लोगों की मदद कर सकते हैं. आप अपने खर्चों में कटोती करके दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने का सोच सकते हैं.  बुध-5 आपके आस पास का माहौल कुछ अस्त व्यस्त सा रह सकता है. खुद को भी आप उसमें उलझा  पा सकते हैं. घर में मेहमानों का आगमन होने से आप अपने लिए समय न निकाल पाएं.  शुक्र-6 आज का दिन परिवार की जरूरतों के अनुसार ही बिते

कुंडली में उपवेशन अवस्था में  स्थित नौ ग्रहों का फल- ज्योतिष मंथन 

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कुंडली में श्यानादि अवस्था में स्थित ग्रह का विचार करना चाहिए.   उपवेशन अवस्था      सूर्य - जिस जातक के जन्म समय में सूर्य उपवेशन अवस्था में हो तो वह सूर्य की दशा में मनुष्य दरिद्रता को भोगता है, यदि सूर्य पीड़ित है तो कलह प्रपंच में लिप्त हो  जाता है. संबंधो में व्यवहार कठोर चित्त वाला हो जाता है.    चन्द्र - जिस जातक के जन्म समय में चन्द्र उपवेशन अवस्था में हो तो वह मनुष्य मानसिक रोग ग्रस्त होता है, चंद्रमा पर शुभ दृष्टि ना होने से बुद्धिहीन व धनहीन भाव को प्राप्त होता है, यदि चंद्रमा को पाप ग्रह देखते हो तो निर्दयी और धन का अपव्यय करने वाला होता है, और यदि चंद्रमा नीच का हो तो दूसरे के धन को लूटने वाला हो सकता है.     मंगल - जिस जातक के जन्म समय में मंगल उपवेशन अवस्था में हो तो तो वह मनुष्य दिखने में ताकतवर होता है, यदि मंगल शुभ दृष्टि से रहित हो तो अवसर वादी होकर पक्षपात करने वाला होता है, मंगल पर राहू का प्रभाव हो तो बहुत झूठ बोलकर धन अर्जित करने वाला होता है. धर्म में रूचि नहीं होती है.      बुध- जिस जातक के जन्म समय में बुध उपवेशन अवस्था में हो तो वह अपने जातक सदगुणों से

ग्रहों की शयन अवस्था से जाने कैसी रहेगी ग्रह की दशा-ज्योतिष मंथन

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      किसी भी कुंडली के फलादेश करने से पूर्व ग्रहों का बलाबल तो देखना ही चाहिए साथ ही, वे ग्रह शयन आदि किस अवस्था में है, यह भी अवश्य देख लेना चाहिए. ग्रहों के अंशों के आधार पर ही ग्रह की ये अवस्था प्रकट होती है.  पाराशरी पद्धति से उपयोग में लाने वाले लगभग सभी प्रमुख सॉफ्टवेर में ग्रहों की ये अवस्था का वर्ग चार्ट उपलब्ध होता है. किन्तु फल कथन नहीं दिया जाता है, इसलिए ग्रहों के शयनादि के फल नीचे दिए है, जिसके आधार पर फलादेश जानने के इच्छुक बहुत ही सरलता से यह जान सकते हैं.          फल कथन में ग्रहों का शयनादि अवस्था फल अत्यन्त प्रभाव होता होता है. जो ज्योतिष के विद्यार्थी कुंडली में गहन शोध करना चाहते हैं, वे इसे भी प्रयोग में लाएं.          इन बारह अवस्थाओं के नाम इस प्रकार से हैं-1. शयन,  2. उपवेशन अवस्था अर्थात बैठी हुई अवस्था, 3. नेत्रपाणि अवस्था अर्थात नेत्रों पर हाथ रखे हुए अवस्था, 4. प्रकाशन अवस्था अर्थात रोशन व प्रज्वलित अवस्था, 5. गमन अवस्था अर्थात प्रस्थान अवस्था, 6. आगमन अवस्था अर्थात आना / प्रस्तावना अवस्था, 7. सभा अवस्था अर्थात सम्मेलन अवस्था, 8. आगम अवस्था अर्थात वृद्ध

1967 में भारतीय सेना ने चीन को दिया था करारा जवाब-एक नहीं दो बार हराया था चीन को

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1967 की लड़ाई की वजह क्या थी     चीनी सैनिकों ने 13 अगस्त, 1967 को नाथू ला में भारतीय सीमा से सटे इलाके में गड्ढे खोदने शुरू कर दिए थे. जब भारतीय सैनिकों ने देखा कि कुछ गड्ढे सिक्किम के अंदर खोदे जाने लगे तो उन्होंने चीनी लोकल कमांडर से अपने सैनिकों को पीछे ले जाने को कहा. इसके बाद भारतीय सेना ने तय किया कि नाथू ला में बाउंड्री स्‍पष्‍ट करने के मकसद से कंटीलें तार लगाए जाएं. यह जिम्मा 70 फील्ड कंपनी ऑफ इंजीनियर्स एवं 18 राजपूत की एक टुकड़ी को सौंपा गया.         18 अगस्‍त को सीमा पर तार लगाने का काम शुरू हुआ.  इसके दो दिन बाद भड़के चीनी हथियार लेकर उन भारतीय जवानों के आगे खड़े हो गए जो तार लगा रहे थे. भारतीय सैनिक साहस के साथ डटे रहे.            6 व 11 सितंबर 1967 को चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी के सैनिकों ने नाथू ला में भारतीय सेना की पोस्‍ट्स पर हमला कर दिया था. 15 सितंबर 1967 को युद्ध विराम हुआ. जिसमें चीन के 100 से ऊपर की संख्या में सैनिक मारे गए.     उसके बाद, 1 अक्टूबर 1967 को नाथू ला से उत्तर की तरफ कुछ किमी दूर चो ला में चीनियों ने फिर घुसपैठ करने की कोशिश की. इसका कारण

19 साल बाद बन रहा है इस साल अधिक मास का योग-हिन्दू पंचांग

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     हर तीन वर्ष बाद आने वाला अधिक मास ज्योतिष दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण घटना होती है. माह में वृद्धि होने के कारण ही इसे अधिक मास की संज्ञा दी गई है.  वर्तमान में 2020 में आश्विन मास का समय अधिक मास का होगा. और यह योग 2001 के बाद इस साल आ रहा है. 19 साल बाद पुनः अधिक मास  का आरंभ 18 सितंबर 2020 को होगा और इसकी समाप्ति 16 अक्टूबर को होगी.    क्या होता है अधिक मास       सूर्य का मेष राशि से होते हुए सभी 12 राशियों में संक्रमण का काल संक्रांति कहलाता है. इसी के द्वारा संवत्सर का निर्माण होता है, इसे सौर वर्ष भी कहा जाता है. पर जब जिस भी मास में सूर्य का किसी भी राशि पर संक्रमण न हो तो वह मास "अधिक मास" कहलाता है. हर तीन वर्ष पश्चात आने वाला यह मास पंचांग की गणना को एक महत्वपूर्ण आयाम देता है. इसी गणना का आधार सौर वर्ष एवं चंद्र वर्ष की स्थिति को सही रुप से अभिव्यक्त करता है.    हिंदू पंचांग गणना में अधिक मास      ज्योतिष एवं धर्म ग्रंथों में इसे पुरुषोत्तम व मल मास के नाम से भी पुकारा जाता है. यह मास आध्यात्मिक उर्जा को वृद्धि देता है. इस का काल गणना में अत्यंत ही प्र

विवाह में हो रहा हो विलम्ब तो करें ये उपाय-ज्योतिष मंथन

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     विवाह समय पर न हो पाना या रिश्ते की बात तो रोज हो लेकिन उसमें भी बात बन न पाए. ऎसे में जातक के मन में निराशा का भाव बढ़ने लगता है. ज्योतिष में ऎसे अनेक कारण बनते हैं जो विवाह में विलम्ब की स्थिति को दर्शाते हैं. वैदिक ज्योतिष में विवाह के लिए सातवां भाव मुख्य माना गया है और इस भाव पर ग्रहों के प्रभाव स्वरूप ऎसी अनेक स्थितियां उत्पन्न होती हैं जिनके चलते शादी में देरी या बार बार बनते रिश्तों का टूटना सहना पड़ता है.        दांपत्य जीवन में कितना सुख मिलेगा या जीवन कैसा रहेगा. यह सब कुण्डली के योगों पर निर्भर करता है. शुभ ग्रह, शुभ भावों के स्वामी होकर जब शुभ भावों में स्थित हों तथा अशुभ ग्रह निर्बल होकर अशुभ भावों के स्वामी होकर, अशुभ भावों में स्थित हों तो व्यक्ति को अनुकूल फल देते हैं. कुण्डली के योग विवाह को किस प्रकार प्रभावित करते है. जातक की कुण्डली में सप्तमेश वक्री हो और मंगल छठे भाव में हो तो ऎसे व्यक्ति की शादी में देरी का योग बनता है. जातक की कुण्डली में सातवें भाव का स्वामी अगर छठे, आठवें, बारहवें भाव या लग्न भाव में स्थित हो तो विवाह में विलम्ब के योग देखने को मिलत

सूर्य ग्रहण समाप्त, गुप्त नवरात्र प्रारम्भ- जाने आषाढ़ गुप्त नवरात्रि साधना का मार्ग 

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आषाढ़ माह का गुप्त नवरात्रि        नवरात्रि के विषय में जितना सामान्य जन-मानस को पता है उसमें चैत्र व शारदीय नवरात्रि ही सबसे प्रमुख माने गए हैं. इन्ही के विषय में कई प्रकार की कथाओं और महत्व का बोध होता है. पर जब हम बात करते हैं अन्य दो ओर नवरात्रि समय की तो उनमें से एक आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होते हैं. आषाढ़ मास में आने वाले नवरात्र को गुप्त रुप से पूजा जाता है. इनका ये विशेष गुप्त रुप सभी के लिए दृष्य न हो पाने के कारण ही ये समय गुप्त नवरात्र विधि के लिए ही जाना जाता है.      इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्र सूर्य ग्रहण के बाद 22 जून,सोमवार से प्रारम्भ होकर 30 जून,मंगलवार तक है.    आषाढ़ गुप्त नवरात्रि साधना का मार्ग               आषाढ़ मास में आने वाले नवरात्रि में शक्ति स्वरुपा दश महाविद्याओं का पूजन होता है. ये समय मंत्र एवं तंत्र की साधन अके लिए अत्यंत ही प्रभावशालि बताया गया है. यदि हम शाक्त संप्रदाय में इस तथ्य को समझें तो पाते हैं की किस प्रकार शक्ति के द्वारा ही सृष्टि का संचालन संभव हो पाता है. शक्ति ही सृष्टि में प्रक्रति का आधार बनती है