शनिवार, 11 जुलाई 2020

गंगा की निर्मलता जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद जी ने अखाड़ा परिषद् का किया समर्थन-अनेक हिन्दू संगठनों भी हुए साथ

Sharda Peeth - Posts | Facebookहरिद्वार | अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी और श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण के महंत व कुम्भ मेला प्रबंधक श्री दुर्गा दासजी महाराज जी द्वारा गंगा को स्कैप चैनल बनाने वाले सरकारी अध्यादेश के विरोध को अब शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ जी का भी समर्थन प्राप्त हो गया है. जगद्गुरु स्वामी अमृतानंद ने पत्र द्वारा अखाड़ा परिषद् को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया.


      श्री मा योग शक्ति दिव्य धाम ट्रस्ट, कनखल के ट्रस्टी श्री इंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि 2016 में हरीश रावत की सरकार द्वारा एक आदेश से हरिद्वार के इस पावन तीर्थ में सदियों से प्रवाहित गंगा के अनेक घाटों को गंदे नाले में परिवर्तित कर दिया है, जिनमें  सुभाष घाट, गऊ घाट, कुशा घाट, हनुमान घाट, श्रवण घाट, राम घाट, विष्णु घाट, बिरला घाट, राज घाट, विश्वकर्मा घाट, कबीर घाट, हरिगिरी संन्यास आश्रम घाट से पाइलट बाबा घाट आदि अनेक घाटों में गंगा के निर्मल जल के स्थान पर सीवरेज का गन्दा मल बह रहा है, जो कि हरिद्वार तीर्थ के लिए बहुत ही चिंता का विषय      


      गंगा की निर्मलता व शुद्धि के लिए अखाड़ा परिषद्  के इस पुनीत कार्य में हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश कौशिक का भी अखाड़ा परिषद् को लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि  वर्तमान में कोराना महामारी के चलते सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अमरनाथ यात्रा, कावंड यात्रा और चार धाम यात्रा प्रतिबन्धित हो चुकी है, किन्तु यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकाला तो अगले वर्ष हरिद्वार कुम्भ के उचित प्रबंध व्यवस्था पर भी ग्रहण लग जाएगा. 


     हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने भी गंगा को दूषित करने वाले सरकारी आदेश को वापस लेने की अपील की और अखाड़ा परिषद् का खुलकर समर्थन किया.  गंगा हमारी सनातन संस्कृति की प्राण प्रवाहिका है. गंगा को नाला कहना और उसे प्रदूषित करने वाले अधिकारीयों व जिम्मेदार व्यक्तियों को दण्डित किया जाना चाहिए. आने वाले 21 के हरिद्वार कुम्भ की तैयारियां शुरू होने से पूर्व हर की पैड़ी से सती घाट तक गंगा को स्कैप चैनल का कलंक मिटाने के लिए अखिल भारत हिन्दू महासभा आपको हर संभव सहायता देने का आश्वासन देती है.   


  Real Time Monitoring System For Measuring Pollution In Ganga


      ज्ञात हो कि उत्तराखण्ड की  पिछली कांग्रेसी सरकार ने 14 दिसम्बर 2016 को आर. मीनाक्षी, सचिव, उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एक आदेश में स्पष्ट रूप से हर की पैड़ी, ब्रह्म कुण्ड में बहने वाली गंगा को एक नाला बताया. जो भी ही दुर्भाग्य पूर्ण कृत्य हुआ.
     मुख्य प्रशासक, आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, देहरादून को ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का सन्दर्भ देते हुए माँ गंगा को एक नाले के रूप में उल्लेखित करते हुए उसमें हरिद्वार शहर के सीवरेज से मल-मूत्र डालने की अनुमति प्रदान की गयी. 
     माँ गंगा नदी के दिव्य स्वरुप जो मुख्य धारा के साथ ही सर्वानंद घाट से सुखी नदी होते हुए हर की पैड़ी ब्रह्म कुण्ड होकर कनखल सती मंदिर तक प्रवाहित होता है. देश विदेश से सनातन धर्म के श्रद्धालु माँ गंगा की इसी अविरल धारा में धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण आदि पवित्र कर्मों को युगों से करते आए हैं. जबकि पिछली उत्तराखंड सरकार का ऐसा आदेश हिन्दू समाज पर एक कलंक साबित हो रहा है. इस बात पर भी आश्चर्य हो रहा है कि वर्तमान में भाजपा सरकार भी इस आदेश को निरस्त करने में किस कारण से विलम्ब कर रही है. 
      ऐसे में गंगा की निर्मलता को दूषित होने से बचाने के लिए आपका महान प्रयास शीघ्र ही सफल होगा. ऐसी हम आशा करते हैं कि वर्तमान सरकार माँ गंगा को स्कैप चैनल यानि नाला घोषित  करने के आदेश व उसमें किसी प्रकार की गंदगी को डालने वाली सीवर लाइन को बंद कर माँ गंगा की धारा को निर्मल करेगी. 
    रती पर अवतरित होने के बाद माँ गंगा हरिद्वार में प्रवाह से बहने लगी, जिसमें सर्वानन्द घाट, खड्खडी शमशान घाट, हरी की पैड़ी-ब्रह्मकुण्ड भगवान्  श्रीहरि के श्री चरणों पर बहुत ही दिव्य स्वरुप में विद्यमान है. पवित्र नगरी हरिद्वार के मुख्य घाट के रूप में भी हर की पैड़ी का महत्व है, क्योंकि समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूँदें हरिद्वार में यही श्री नारायण के चरणों में गिरी थी.  
     इसके उपरान्त माँ गंगा कुशावर्त घात जिसे कुशा घाट के नाम से जाना जाता है, यहाँ साल भर श्राद्ध कर्म होता है, साथ ही देव कार्य भी संपन्न होते हैं. भगवान ने दत्तात्रेय ने इसी स्थान पर तपस्या की थी जिस पर गंगा मैया ने कुशा को नहीं उखड़ने दिया, इसी कारण से इसे कुशावर्त घाट कहा जाता है. इसके उपरान्त  डामकोठी से सती घाट में माँ गंगा प्रवाहित हो रही है, यहाँ भी अस्थि विसर्जन के लिए वर्ष भर श्रद्धालु आते हैं. यहाँ से राजघाट से होते हुए कनखल के श्मशान घाट फिर दक्ष प्रजापति घाट होते हुए माँ गंगा अपने सनातन स्वरुप में बह रही हैं. 
   


 


मंगलवार, 7 जुलाई 2020

पाकिस्तान के कब्जे में है काश्मीर का श्री शारदा सर्वज्ञ महाशक्ति पीठ


             नमस्ते शारदे देवि, काश्मीरपुर वासिनी, त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्यादानं च देहि मे 


    श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर भारतवर्ष के अट्ठारह महाशक्ति पीठों में सबसे अग्रणी है. भगवान् शिव के अवतार आदि शंकर ने अपनी शिवलीला के कारण  यहीं महाशक्ति पीठ पर माँ शारदा से जगद्गुरु होने का आशीर्वाद प्राप्त किया था. हिमालय के इस स्वर्ग काश्मीर देश की अधिष्ठात्री देवी 'शारदा' मानी जाती हैं, इसी कारण 'शारदादेश' या 'शारदमंडल' कहलाता है और इसी से वहाँ की लिपि को 'शारदालिपि' कहते हैं. 
    शारदा, जिसे स्थानीय भाषा में शारदी भी कहते हैं, वर्तमान में पाक-अधिकृत कश्मीर के नीलम ज़िले में स्थित एक तहसील के रूप में आज भारत के मानचित्र में है.  यह नीलम ज़िले की दो तहसीलों में से एक है. किशनगंगा घाटी (नीलम घाटी) में यह माँ शारदा का यह महाशक्ति पीठ के अब भग्नावशेष बचे है. यह किशनगंगा नदी के किनारे 1981 मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है.
     शारदा महाशक्ति पीठ क्षेत्र में मधुमती और कृष्णगंगा के संगम पर गया, हरिद्वार के बाद पितृ कर्म अनुष्ठान व देव कार्य के लिए सनातन धर्मी आते थे.


     नीलमत पुराण में भी काश्मीर के देव स्थानों में बाबा अमरनाथ के तुल्य ही इस शारदा मंदिर का उल्लेख हुआ है. कल्हण ने अपनी राजतरंगिणी में लिखा है कि हिन्दू सम्राट महाराजा ललितादित्य ने इस शारदा महाशक्ति पीठ के तत्वाधान में संचालित 'शारदा विश्वविद्यालय, शारदा सर्वज्ञ पीठ में चारों दिशाओं से विद्यार्थी आकर वैदिक दर्शन, कला व विज्ञान का अध्ययन करते थे. 
आदि शंकर को जगत गुरु की उपाधि 
   भगवान शिव के 28वें अवतार के रूप में आदि शंकर का जन्म एक शिव भक्त के घर कालड़ी ग्राम, केरल में हुआ. बाल अवस्था में ही उन्होंने अपना दक्षिणामूर्ति रूप प्रकट कर दिया. सात वर्ष की आयु में ही चारों वेदों को कंठ में धारण कर लिया. फिर माता की अनुमति से घर त्याग कर संन्यास ले लिया.  शिव लीला के लिए गुरु गोविन्द पाद से दीक्षा लेकर वे देश भर में वैदिक धर्म की स्थापना के लिए निकल पड़े. 
   



                  शारदा सर्वज्ञ पीठ तीर्थ क्षेत्र, कृष्ण गंगा नदी, नीलम घाटी, पाक अधिकृत काश्मीर, भारत  


सनातन धर्म से विमुख ब्राह्मणों और बौद्ध विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित करते जा रहे थे. किन्तु जगद्गुरु की उपाधि के लिए उन्हें काश्मीर के इस शारदा सर्वज्ञ पीठ पर आना पड़ा, क्योंकि उसका दक्षिण द्वार अर्थात् भारत द्वार बंद था. इस चुनौती को स्वीकार करते हुए इस सर्वज्ञ पीठ की विद्वत सभा को सम्पूर्ण अध्यात्म दर्शन विषयमें परास्त किया और 'जगद्गुरु' की उपाधि से अलंकृत हुए. फिर माँ शारदा के साक्षात् दैवीय रूप से आत्मज्ञान की लीला की. इसके उपरांत ही आदि शंकर ने माँ शारदा की अनुकृति रूप भारतवर्ष के चार कोणों में चार शंकर-शारदा मठ की स्थापना की. पूर्व में द्वारिकापीठ, दक्षिण में श्रृंगेरीपीठ , पूर्व में पूरीपीठ और उत्तर में ज्योतिर्पीठ  में अपने चार शिष्यों को आचार्य नियुक्त किया. 
    इन चार पीठों के माध्यम से ही भारतवर्ष में सनातन धर्म की आश्रम व वर्ण व्यवस्था को सुव्यस्थित किया. वास्तव में ये चार मठ काश्मीर के शारदा सर्वज्ञ मठ की अनुकृति रूप ही हैं, जिससे भारत भूमि पर चक्रवर्ती सनातन धर्म का शासन स्थापित हो. इसी कारण शिव का यह शंकर अवतार हुआ. जम्बुद्वीप में भारतवर्ष प्रसिद्ध है और भारतवर्ष में काश्मीर देवलोक के समान प्रशंसनीय है.किन्तु काश्मीर में स्थित शारदा सर्वज्ञ महाशक्ति पीठ की महिमा तो त्रिलोक में फैली हुई है. 


पौराणिक महत्व 
     समुद्र मंथन में चौदह रत्नों में से एक 'अमृत' को देवताओं में वितरण करने में राहू छल से देवताओं की पंक्ति में बैठकर 'अमृत' पान कर लिया, भगवान् विष्णु को उस राहू असुर पर सुदर्शन चला दिया किन्तु राहू सर काटे जाने के बाद भी नहीं मरा, अमृत के प्रभाव से सदा के लिए अमर हो गया. फिर यह अमृत असुरों को प्राप्त न हो इसके लिए देवताओं ने 'अमृत कलश' को माँ शारदा को दे दिया. कलश से अमृत की कुछ बूँदें नासिक, उज्जैन, प्रयाग व हरिद्वार में गिरी थी, इसलिए वहां प्रत्येक बारह वर्षों में धर्मसभा हेतु 'महाकुम्भ' का आयोजन होता है.


     माँ शारदा ने उस 'अमृत कलश' को मधुमती नदी और कृष्णगंगा के तट पर भूमि के भीतर छिपा दिया, फिर अपने एक अंश को पाषाण शिला बनकर उसे ढक दिया. तभी से उस स्थान पर माँ शारदा महाशक्ति रूप में विद्यमान है. कालान्तर में, इसी शिला को माँ शारदा देवी के रूप में पूजा जाता रहा, अनेक दिव्य चमत्कारों व आशीर्वाद से माँ अपने भक्तों का कल्याण करती है. तभी से योग-तंत्र-मन्त्र व अध्यात्मिक शक्तियों की सिद्धि के लिए यह शारदा सर्वज्ञ पीठ विश्वभर के साधकों का आकर्षण बन गई. विश्व के वैदिक विद्वानों को एक सूत्र में बाँधने के लिए जगद्गुरु की उपाधि की परम्परा भी इसी शारदा पीठ से प्रारम्भ हुई. 



    कृष्ण गंगा नदी का मनोरम तट पर बसा शारदा तहसील, जहाँ हिन्दू तर्पण व देव अनुष्ठान के लिए आते थे 
   


     नीलमत पुराण के अनुसार इस शारदा तीर्थ में स्नान करने से एक सहस्र गौ दान का फल प्राप्त होता है. ऋषि शांडिल्य ने भी यहाँ आकर तपस्या की थी. तपस्या से प्रसन्न होकर माँ शारदा ने उन्हें दर्शन देकर उनका मनोरथ पूर्ण किया. 
    जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने भी यहाँ  महाशक्ति पीठ- शारदा सर्वज्ञ पीठ से प्रेरणा प्राप्त की. 12 वीं सदी के महान हिन्दू महाराजा ललितादित्य से लेकर 1947 तक यह तीर्थ सनातन धर्म का केंद्र रहा. 
  डोगरा राजपूत महाराजा गुलाब सिंह (1822-1856) से लेकर महाराजा हरी सिंह (1925-1947) के शासन काल में शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर को बहुत भूमि दान में प्रदान की.  देश के विभाजन के उपरान्त पाकिस्तान द्वारा काश्मीर के इस भू-भाग पर कब्ज़ा होने के बाद यह शारदा सर्वज्ञ पीठ विधर्मियों द्वारा नष्ट-भ्रष्ट किया जा रहा है. यह पावन मंदिर आज वहां एक खँडहर के रूप में बचा हुआ है. कभी प्रतिवर्ष यहाँ माघ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को दीक्षांत पर्व का आयोजन होता था. इस दीक्षांत समारोह में देश-विदेश से योग व अध्यात्म प्रेमी श्रद्धालु जन भाग लेते थे. सार्वदेशिक विद्वत वर्ग के लिए सदैव यह शारदा भूमि वन्दनीय रही है. इस शारदा देश काश्मीर में वास करने वाले हिन्दुओं को वर्ण व्यवस्था के भेद से ना देखकर उन्हें काश्मीरी पंडित-शारदा देश विद्वान कहा जाता है. 


                               कृष्ण गंगा नदी पर बना पुल, पाक अधिकृत काश्मीर       


     व्याकरण के मनीषी पाणिनि, योग ऋषि पतंजलि, वाग्भट्ट, चरक आदि अनेक विभूतियों की जन्म स्थली यह दिव्य भूमि रही है. फलतः चिकित्सा शास्त्र, खगोल शास्त्र, ज्योतिष शास्त्र, विमान तकनीकी कला, दर्शन, भवन व वास्तु शिल्प कला के अनेक ग्रंथों का प्रकाशन इसी शारदा भूमि से हुआ. 
    सिखों के दुसरे गुरु अंगद देव जी ने पंजाब से फारसी भाषा की दासता से मुक्ति के लिए जिस गुरुमुखी का चलन प्रारम्भ किया उसके मूल में भी शारदा लिपि है. 
    सातवीं सदी के चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस शारदा सर्वज्ञ पीठ का भ्रमण किया, जिसकी प्रशंसा करते हुए लिखा कि प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में हिन्दू तीर्थ यात्री व धर्माचार्य इस पीठ पर माँ शारदा के दर्शन करते हैं.
  ग्यारहवीं सदी के इतिहासकार अलबरूनी ने इस शारदा महाशक्ति पीठ-शारदा सर्वज्ञ पीठ की तुलना मुल्तान के शिव मंदिर, गुजरात के सोमनाथ और थानेश्वर के विष्णु चक्रस्वामिन् मंदिर की भव्यता से कर दी थी. साथ ही इस इतिहासकार ने काश्मीर, हिमाचल व पंजाब में प्रयोग होने वाली शारदा लिपि को 'सिद्ध मात्रिक' नाम से उल्लेख किया है,क्योंकि शारदा वर्णमाला "ओम् स्वस्ति सिद्धम्" से आरम्भ होता है.
    विद्यापति - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी ...


     ग्यारहवीं सदी के ही मनीषी कवि कल्हण जो काश्मीर छोड़ के चोलुक्य साम्राज्य के राजा विक्रमादित्य छठे के राजसभा के 'विद्यापाठी' नियुक्त हुए, ने भी देवि शारदा सर्वज्ञ पीठ की अद्भुत महिमा लिखी. 
    सोहलवीं सदी के अबुल फ़जल ने इस पवित्र शारदा मंदिर के चमत्कार के विषय में लिखा कि हर हिन्दू महीने की अष्टमी को दैवीय घटनाएं घटती थी. 
      यह शारदा सर्वज्ञ पीठ आज विदेशी आक्रांताओ के कब्जे में हैं, जिसे मुक्त कराने के लिए भारत ही विश्व भर से हिन्दू एक जुट हो रहे हैं. सनातन धर्म और भारतीयता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. और इसी सनातन धर्म के उत्स में शारदा देश काश्मीर है. 


   श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर


 


शनिवार, 4 जुलाई 2020

5 जुलाई रविवार, मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

 
















कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष -लेख पढ़े   click the link below


https://savarkartimes.page/article/kaise-gyaat-karen-apana-shubh-moolaank-ank-jyotish/jJr5Om.html


5 जुलाई शुक्रवार, मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन


1


छात्रों को अपनी मेहनत अधिक बढ़ाने की जरूरत होगी.  खासकर उन छात्रों को अधिक मेहनत करनी होगी जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. आज आप माता-पिता कि ओर से अधिक बातें सुनने को मिल सकती हैं. 


2


स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय थोड़ा परेशान कर सकता है. आप बाहर के खाने से खुद को बचा कर रखें. आज आप कुछ आलसी अधिक हो सकते हैं. 


3


आप अपनी बात पर कुछ ज्यादा ही अड़ने वाले हैं जो शायद आपके लिए सही न हो. खुद को स्थिति के अनुरूप ढालना आपके लिए अच्छा होगा. 


4


यह समय नयी योजनाएं को बनाने में लगेगा. काम को लागू करने में दिक्कतें आ सकती हैं. जरुरी यह है कि आप डटे रहें. 


5


किसी भी चीज को क्रिन्यान्वित करने के लिए समय अनुकूल है. इस समय आपकी प्रबंधन क्षमता अपने अच्छे स्तर पर हो सकती है. 


6


आपकी बुद्धि क्षमता आज बेहतर होगी. आज का दिन आप अपनी पुरानी योजनाओं को आगे बढ़ाने में लगे होंगे. किसी के साथ अधिक बोलचाल आपको परेशानी में डाल सकती हैं. इसलिए ज्यादा लोगों के साथ कम ही मिलें. 


7


निर्णय लेने में अप सही से काम न कर पाएं. आपका मन किसी बात को लेकर अधिक परेशानी में हो सकता है. आपको इस समय बातों को लेकर सपष्टता की कमी झेलनी पड़ सकती है.


8


कुछ काम ज्यादा बेहतर रुप से न हो पाएं पर आप धीरे धीरे उस पर पकड़ बना सकते हैं. आज कुछ लोग  आपसे महत्वपूर्ण विषयों पर सलाह लेने के लिए संपर्क कर सकते हैं. 



आप सामाजिक रुप से आगे बढ़ सकते हैं. समाज में रूतबा बढ़ेगा. आप के लिए जरूरी है की खुद को सकारात्मक बना कर काम करें तो अच्छा होगा. 


आचार्या राजरानी शर्मा, ज्योतिष विशेषज्ञ 


 

 


 



 



 













 











 

 








 

 







 







 




 





 



 




शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

गंगा को गंदा नाला बनाने का घिनौना खेल-नमामि गंगा क्या केवल नारा मात्र रह गया है?

    Ganga pollution unabated in Haridwar- Study by PSI


  गंगा को पिछले कई वर्षों से नाला बनाने का षड्यंत्र चल रहा है, उसके विरोध में अब महंत श्री दुर्गा दासजी महाराज ,कुम्भ मेला प्रबंधक, श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण राजघाट, कनखल ने मोर्चा खोल लिया है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी जी ने भी गंगा को निर्मल और अविरल करने के लिए वर्तमान उत्तराखंड सरकार से उस आदेश को निरस्त करने की मांग कि जिसके तहत हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने गंगा को नाले में बदल दिया. 


    उत्तराखंड सरकार ने 14 दिसम्बर 2016 को आर. मीनाक्षी, सचिव, उत्तराखंड सरकार द्वारा हरिद्वार विकास प्राधिकरण को जारी एक आदेश में लिखा कि सर्वानंद घाट से हर की पैड़ी- ब्रह्म कुण्ड व कनखल में बहने वाली गंगा एक नाला है, इसमें सीवरेज जोड़ा जा सकता है. इसी आदेश में गंगा को सरंक्षित करने के ग्रीन ट्रिब्यूनल किसी गाइड लाइन का कानून की पाबंदी न होने का उल्लेख हुआ, और दुर्भाग्य से हरीश रावत की से लेकर अब उत्तराखंड की भाजपा सरकार भी  इसी आदेश को स्थायी रखते हुए है. 




 मुख्य प्रशासक, आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, देहरादून को ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों का सन्दर्भ देते हुए माँ गंगा को एक नाले के रूप में उल्लेखित करते हुए उसमें हरिद्वार शहर के Sewage से मल-मूत्र डालने की अनुमति प्रदान की गयी. 
     माँ गंगा नदी के दिव्य स्वरुप जो मुख्य धारा के साथ ही सर्वानंद घाट से सुखी नदी होते हुए हर की पैड़ी ब्रह्म कुण्ड होकर कनखल सती मंदिर तक प्रवाहित होता है. देश विदेश से सनातन धर्म के श्रद्धालु माँ गंगा की इसी अविरल धारा में धार्मिक अनुष्ठान, तर्पण आदि पवित्र कर्मों को युगों से करते आए हैं. जबकि पिछली उत्तराखंड सरकार का ऐसा आदेश हिन्दू समाज पर एक कलंक साबित हो रहा है. इस बात पर भी आश्चर्य हो रहा है कि वर्तमान में भाजपा सरकार भी इस आदेश को निरस्त करने में किस कारण से विलम्ब कर रही है. 
  WWF report reveals Ganga is Worlds Most unsafe River in hindi    


      ऐसे में गंगा की निर्मलता को दूषित होने से बचाने के लिए आपका महान प्रयास शीघ्र ही सफल होगा. ऐसी हम आशा करते हैं कि वर्तमान सरकार माँ गंगा को स्कैप चैनल यानि नाला घोषित  करने के आदेश व उसमें किसी प्रकार की गंदगी को डालने वाली सीवर लाइन को बंद कर माँ गंगा की धारा को निर्मल करेगी. 
    धरती पर अवतरित होने के बाद माँ गंगा हरिद्वार में प्रवाह से बहने लगी, जिसमें सर्वानन्द घाट, खड्खडी शमशान घाट, हरी की पैड़ी-ब्रह्मकुण्ड भगवान्  श्रीहरि के श्री चरणों पर बहुत ही दिव्य स्वरुप में विद्यमान है. पवित्र नगरी हरिद्वार के मुख्य घाट के रूप में भी हर की पैड़ी का महत्व है, क्योंकि समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूँदें हरिद्वार में यही श्री नारायण के चरणों में गिरी थी.  
      इसके उपरान्त माँ गंगा कुशावर्त घात जिसे कुशा घाट के नाम से जाना जाता है, यहाँ साल भर श्राद्ध कर्म होता है, साथ ही देव कार्य भी संपन्न होते हैं. भगवान ने दत्तात्रेय ने इसी स्थान पर तपस्या की थी जिस पर गंगा मैया ने कुशा को नहीं उखड़ने दिया, इसी कारण से इसे कुशावर्त घाट कहा जाता है. इसके उपरान्त  डामकोठी से सती घाट में माँ गंगा प्रवाहित हो रही है, यहाँ भी अस्थि विसर्जन के लिए वर्ष भर श्रद्धालु आते हैं. यहाँ से राजघाट से होते हुए कनखल के श्मशान घाट फिर दक्ष प्रजापति घाट होते हुए माँ गंगा अपने सनातन स्वरुप में बह रही हैं. 
     श्री मा योग शक्ति दिव्य धाम ट्रस्ट, कनखल के ट्रस्टी श्री इंद्र मोहन मिश्र ने बताया कि सरकार द्वारा इस पावन तीर्थ के अनेक घाटों में गंगा को नाले में परिवर्तित कर दिया है, जिनमें  सुभाष घाट, गऊ घाट, कुशा घाट, हनुमान घाट, श्रवण घाट, राम घाट, विष्णु घाट, बिरला घाट, राज घाट, विश्वकर्मा घाट, कबीर घाट, हरिगिरी संन्यास आश्रम घाट से पाइलट बाबा घाट आदि अनेक घाटों में गंगा के निर्मल जल के स्थान पर सीवरेज का गन्दा मल बह रहा है, जो कि हरिद्वार तीर्थ के लिए बहुत ही चिंता का विषय है.  
     वर्तमान में कोराना महामारी के चलते सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अमरनाथ यात्रा, कावंड यात्रा और चार धाम यात्रा प्रतिबन्धित हो चुकी है, किन्तु यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकाला तो अगले वर्ष हरिद्वार कुम्भ के उचित प्रबंध व्यवस्था पर भी ग्रहण लग जाएगा. क्या हमारे आस्थावान सनातनधर्मी उत्तराखंड सरकार द्वारा घोषित 'नाले' में स्नान करने कुम्भ आएँगे.  इसलिए सभी संतों व विद्वानों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे हिन्दुओं की आस्था को मिटाने का षड्यंत्र सफल ना हो सके. गंगा को नाला मानने वाले सरकारी आदेश को अविलम्ब वापस लिया जाए. 
     गंगा हमारी सनातन संस्कृति की प्राण प्रवाहिका है. गंगा को नाला कहना और उसे प्रदूषित करने वाले अधिकारीयों व जिम्मेदार व्यक्तियों को दण्डित किया जाना चाहिए. आने वाले 21 के हरिद्वार कुम्भ की तैयारियां शुरू होने से पूर्व हर की पैड़ी से सती घाट तक गंगा को स्कैप चैनल का कलंक मिटाने के लिए साधू संतों व धर्माचार्यों का मिलकर प्रयास करना होगा, तभी नमामि गंगा अभियान सफल होगा. 


3 जुलाई शुक्रवार, मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन

           


    कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष click the link below


https://savarkartimes.page/article/kaise-gyaat-karen-apana-shubh-moolaank-ank-jyotish/jJr5Om.html


दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन


1


आपकी मेहनत का असर दिखाई देगा. आज का दिन आप कुछ अपनों कि ओर से थोडी़ सहयोग की स्थिति देख सकते हैं. बच्चों को लेकर आप अधिक संजीदा दिखाई देंगे. 


2


अपने खान-पान में लापरवाही न बरतें. आज आपकी मेहनत अधिक रह सकती है. कुछ कारन से किसी की बात परेशान कर जाए. जरुरी है कि आप चीजों को गंभीरता से लेने से बचें. 


3


आपको अगर शुगर से संबंधित दिक्कत है तो वह परेशान कर सकती है. अपने वजन बढ़ने की दिक्कतें आप पर हावि हो सकति हैं. किसी गुरु का परामर्श राहत देने वाला भी होगा. 


4


अपने प्रयास को लगातार जारी रखें.  आपकी मेहनत का पूरा फल न मिल पाए. कुछ लाभ में कमी भी होती दिखाई देती है. पेरेंटस बच्चों को लेकर लापरवाह नहीम हों. 


5


आपके लिए आज का दिन मिश्रित या औसत रिजल्ट दे सकता है. यह गोचर समय अपने काम और अपनी बातों का ध्यान से उपयोग करें. छोटी सी बात का आक्षेप भी आप पर लगाया जा सकता है. 


6


दूसरे आप पर के मन पर गहरी छाप न छोड़ पाएं. आप अपनी सोच के कारण काफी परेशानी में रह सकते हैं. इस समय अगर हो सके तो कुछ समय अपनी पसंद की चीजों पर ध्यान लगाएं. 


7


लाभ के मामले में आप ज्यादा लकी न हों पर काम चल जाएगा. दूसरे के कारण आपका काम देरी से हो सकता है. आज की पार्टी में शामिल हो सकते हैं. 


8


अगर किसी काम पर एकाग्रता नही बन पा रही है तो थोड़ा ब्रेक ले लेना बेहतर होगा. वैवाहिक मसले आसानि से सुलझ ना पाए पर शाम होते होते आप कुछ राहत देख सकते हैं.  


9


आपकी साहस की वृति, में बढ़ोतरी का समय है. ऎसा होने से आप  व्यवधानों से पार पाने में कामयाब हो सकते हैं. 


गुरुवार, 2 जुलाई 2020

अब रूस से पंगा लेने पर तुला चीन- रूस के व्लादिवोस्तोक शहर को बताया अपना

US accuses China, Russia of coordinating on virus conspiraciesनई दिल्ली. 2 जुलाई |  रूस से पंगा लेने पर तुला चीन, अब रूस के व्लादिवोस्तोक शहर पर चीन का दावा, कहा-1860 से पहले हमारा था


   


    चीन में जितने भी मीडिया संगठन हैं सभी सरकारी है.  ऐसी स्थिति में सीजीटीएन के संपादक  शेन सिवई का ट्वीट अहम हो जाता है, चीन के सरकारी समाचार चैनल सीजीटीएन के संपादक शेन सिवई ने दावा किया कि रूस का व्लादिवोस्तोक शहर 1860 से पहले चीन का हिस्सा था.









Shen Shiwei沈诗伟

 



@shen_shiwei










 










This “tweet” of #Russian embassy to #China isn’t so welcome on Weibo “The history of Vladivostok (literally 'Ruler of the East') is from 1860 when Russia built a military harbor.” But the city was Haishenwai as Chinese land, before Russia annexed it via unequal Treaty of Beijing.







 







    चीन अपनी विस्तारवादी नीति के कई आत्मघाती फैसले ले  रहा है, भारत और रूस ही नहीं लगभग 18 देशों से चीन ने भूमि कब्जाने को लेकर एक प्रकार का युद्ध छेड़ा हुआ है.  रूस के शहर पर अपना दावा करने के सन्दर्भ में कहा कि रूस के ब्लादिवोस्तोक शहर को पहले हैशेनवाई कहते थे. जिसे रूस ने 160 साल पहले रूस से एकतरफा संधि के तहत चीन से छीन लिया था. 
अब रूस के व्लादिवोस्तोक शहर पर चीन के इस दावे से पर आश्चर्य नहीं करना चाहिए. चीन 18 देशों की भूमि हड़पने की होड़ में अपने विनाश के करीब पहुच चूका है. 


चीन ने जिन देशों की भूमि को हड़पने के लिए युद्ध की स्थिति में आ गया है, उन देशों की सूची 


गंगा को नाला मानने वाले सरकारी आदेश को अविलम्ब वापस लिया जाए-हरिद्वार में संतों में आक्रोश

गंगा की अविरल धारा को रोकने पर गूंगी ...


हरिद्वार, 2 जुलाई | वर्ष 2016 से हरीश रावत की उत्तराखंड सरकार द्वारा गंगा को स्कैप चैनल यानि नाला घोषित किया हुआ है, जिसे अभी तक भाजपा की सरकार ने निरस्त नहीं किया है. इस कारण गंगा की निर्मलता को दूषित होने से बचाने के लिए, कुम्भ मेला प्रबंधक श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण राजघाट कनखल, हरिद्वार के महंत श्री दुर्गा दासजी महाराज ने आज हरिद्वार में बैठक की. जिसमें प्रमुख संतों ने भाग लिया. 


    महंत श्री दुर्गा दासजी महाराज ने पिछली कांग्रेस की उत्तराखंड सरकार के एक आदेश पत्र के सन्दर्भ से बताया कि किसी षड्यंत्र के तहत ही सर्वानंद घाट से सुखी नदी होते हुए शमशान घाट फिर हर की पैड़ी, ब्रह्मकुंड,हरिद्वार से डामकोटी,कनखल और डामकोटी से सती घाट तक की गंगा को स्कैप चैनल यानि नाला घोषित करके उसमें हरिद्वार शहर का सीवरेज से निकलने वाला मल मूत्र डाला जा रहा है. यह बहुत ही दुखद और गंभीर विषय है कि उत्तराखंड की वर्तमान हिंदूवादी सरकार ने अभी तक गंगा की निर्मलता और पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले इस आदेश को निरस्त नहीं किया. गंगा सनातन धर्म की प्राण प्रवाहिका है. गंगा को नाला कहना और उसे प्रदूषित करना दंडनीय अपराध है.


 बैठक के संयोजक पं इंद्र मोहन मिश्रा ने कहा कि आने वाले 21 के हरिद्वार कुम्भ की तैयारियां शुरू होने से पूर्व हर की पैड़ी से सती घाट तक गंगा को स्कैप चैनल का कलंक मिटाने के लिए साधू संतों और हिन्दू वादी संगठनों की एक बैठक अगले सप्ताह कनखल में आयोजित होगी. 


   हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य मदन ने दूरभाष पर बातचीत करते हुए महंत दुर्गा दासजी महाराज को उनके द्वारा छेड़े 'गंगा मुक्ति आन्दोलन' के लिए समर्थन का आश्वासन दिया. साथ ही कहा.कि वर्तमान में कोराना महामारी के चलते सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अमरनाथ यात्रा, कावंड यात्रा और चार धाम यात्रा प्रतिबन्धित हो चुकी है, किन्तु यदि शीघ्र ही समाधान नहीं निकाला तो 21 के हरिद्वार कुम्भ में भी ग्रहण लग जाएगा. इसलिए सभी संतों व विद्वानों को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे हिन्दुओं की आस्था को मिटाने का षड्यंत्र सफल ना हो सके. गंगा को नाला मानने वाले सरकारी आदेश को अविलम्ब वापस लिया जाए. 


जुलाई 5, 2020 को रविवार के दिन-आषाढ़ मास की पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा 

Guru Purnima Chandra Grahan 2020 Date गुरु पूर्णिमा ...



आषाढ़ पूर्णिमा


     आने वाली 5 जुलाई के दिन आषाढ़ पूर्णिम का पर्व मनाया जाएगा. आषाढ़ मास को आने वाली पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णीमा और गुरु पूर्णिमाके नाम से भी जाना जाता है. पूर्णाम तिथि के शुभ अवसर पर दो महत्वपूर्ण कार्य संपन्न किए जाते हैं. इस दिन भगवान श्री विष्णु का पूजन किया जाता है और दूसरा कार्य गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है. इस वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा जुलाई 5, 2020 को रविवार के दिन मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि आरंभ - 04 जुलाई, 2020 को 11:33 मिनिट पर होगा. पूर्णिमा तिथि की समाप्ति  - 05 जुलाई, 2020 को 10:13 पर होगी



आषाढ़ पूर्णिमा पर होगी सत्यनारायण कथा


  जानें, पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती ...


      पूर्णिमा तिथि के उपलक्ष्य पर भगवान सत्यनारायण का पूजन होता है और कथा को पढ़ा व सुना जाता है. इस कथा के पूजन द्वारा ही पूर्णिमा का व्रत संपूर्ण माना जाता है. 4 जुलाई को होगी सत्यनारायण कथा और चंद्रमा का पूजन किया जाएगा. आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन श्री हरि का पूजन होता है. इस दिन प्रातः काल स्नान इत्यादि नित्य कार्यों से निवृ्त होकर पूर्णिमा के व्रत का संकल्प किया जाता है. श्री विष्णु के अनेक नामों का स्मरण किया जाता है और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है. व्रती को चाहिए कि पूरे दिन श्री विष्णु का ध्यान करते हुए अपने अन्य कार्य संपन्न करे. 



    भगवान के पूजन में तुलसी, धूप, दीप, गंध,पुष्प व फल इत्यादि का उपयोग किया जाता है. सामर्थ्य अनुसार भक्ति भाव के साथ पूजा करनी चाहिए.  पूजा के पश्चात भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाना चाहिए. भोग को प्रसाद स्वरूप सभी लोगों के मध्य वितरित करना चाहिए.  


Guru Purnima 2020: Know these rules before worshiping and ...
आषाढ़ मास की पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा 


     आषाढी़ पूर्णीमा के दिन गुरु का पूजन भी किया जाता है. आप जिसे भी अपना गुरु मानते हैं उसके प्रति आज के दिन सम्मान का भाव अवश्य प्रकट करना चाहिए. जिस प्रकार आषाढ़ मास के समय आकाश बादलों से घिर जाता है तो उस अंधकार को दूर करने के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए किसी गुरु का होना अत्यंत आवश्यक होता है. गुरु काज्ञान ही जीवन के हर मार्ग को आलोकित करने में सक्षम होता है. 



     भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान श्रेष्ठ रहा है. ईश्वर से भी आगे उस गुरु को ही स्थान प्राप्त होता है. प्राचीन काल से गुरु शिष्य परंपरा की धरोहर आज भी मौजूद है.  इसी कारण से यह समय प्रभावी है. गुरू के ज्ञान एवं उनके स्नेह के प्रति आभार प्रकट करने के लिए इस दिन के शुभ अवसर पर गुरु पूजा का विधान है. 



     जीवन में गुरु का स्वरुप किसी भी रुप में प्राप्त हो सकता है. यह शिक्षा देते शिक्षक हो सकता है, माता-पिता हो सकते हैं, या कोई भी जो हमें ज्ञान के पथ का प्रकाश देते हुए हमारे जीवन के अधंकार को दूर कर सकता है. 


गुरु के पास पहुंचकर ही शांति, भक्ति और शक्ति प्राप्त होती है.


कोकिला व्रत 4 जुलाई 2020 को शनिवार्-दांपत्य जीवन को खुशहाल होने का वरदान

कोकिला व्रत की कथा एवं इतिहास | Kokila ...


कोकिला व्रत महत्व 


     कोकिला व्रत की ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी सुखों की प्राप्ति संभव हो पाति है. यह दांपत्य जीवन को खुशहाल होने का वरदान प्रदान करता है. इस व्रत के द्वारा मन के अनुरुप शुभ फलों की प्राप्ति होती है. शादी में आ रही  किसी भी प्रकार की दिक्कत हो तो इस व्रत का पालन करने से विवाह का सुख प्राप्त होता है.   यह व्रत योग्य वर की प्राप्ति कराने में सहायक बनता है. 



इस वर्ष कोकिला व्रत 4 जुलाई 2020 को शनिवार् के दिन रखा जाएगा.   


कल मनाया जाएगा कोकिला व्रत, जानिए ...
कोकिला व्रत की कथा


      कोकिला व्रत की कहानी का संबंध शिव पुराण में भी प्राप्त होता है. कथा इस प्रकार है ब्रह्मा के मानस पुत्र दक्ष के घर देवि सती का जन्म होता है. दक्ष विष्णु का भक्त था और भगवान शिव से द्वेष रखता था. जब बात सती के विवाह की होती है, तब राजा दक्ष कभी भी सती का संबंध भगवान शिव से जोड़ना नहीं चाहते थे. राजा दक्ष के मना करने पर भी सती ने भगवान शिव से विवाह कर लिया होता है.  पुत्री सती के इस कार्य से दक्ष इतना क्रोधित होते हैं कि वह उससे अपने सभी संबंध तोड़ लेते हैं. कुछ समय बाद राजा दक्ष शिव अपमान करने हेतु एक महायज्ञ का आयोजन करते हैं. उसमें दक्ष अपनी पुत्री सती और दामाद  भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया।



     देवी सती को जब अपने पिता के इस कार्य का बोध होता है तो वह उस यज्ञ में जाने के लिए तैयार होती हैं भगवान शिव उन्हें इस बात की इजाज़त नहीं देते हैं. पर देवी सती की जिद के आगे हार जाते हैं और उन्हें जाने देते हैं. सती यज्ञ पर जाकर जब अपने पति का स्थान नहीं पाती तो अपने पिता दक्ष से इसके बारे में पूछती हैं लेकिन दक्ष अपनी पुत्री सती और शिव का अपमान करते हैं. शिव के प्रति अपमान जनक शब्दों को वह सहन नहीं कर पाती हैं और उस यज्ञ के हवन कुण्ड में अपनी देह का त्याग कर देती 



     भगवान शिव को जब पता चलता है तो वह दक्ष और उसके यज्ञ  को नष्ट कर देते हैं. शिव सती के वियोग को नही सह पाते हैं और शिव की इच्छा  के विरुद्ध जाकर यज्ञ में जाकर प्राणों को त्यागने पर उन्हें हजार वर्षों तक कोयल बनने का श्राप देते हैं. देवी सती कोयल बनकर हजारों वर्षों तक भगवान शिव को पुन: पाने के लिए तपस्या करती हैं. उनकी तपस्या का फल उन्हें पार्वती रुप में शिव की प्राप्ति के रुप में मिलता है. तब से कोकिला व्रत की महत्ता स्थापित होती है.



कोकिला व्रत महिमा


     आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखा गया ये व्रत संपूर्ण सावन में आने वाले व्रतों का आरंभ होता है. इस व्रत में देवी के स्वरूप कोयल रुप में पूजा जाता है. कहा जाता है कि माता सती ने कोयल रुप में भगवान शिव को पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या के शुभ फल स्वरूप उन्हें पार्वती रुप मिला और जीवन साथी रुप में भगवान शिव की प्राप्ति होती है. 


2 जुलाई 2020 बृहस्पतिवार,दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन



 कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष click the link below


https://savarkartimes.page/article/kaise-gyaat-karen-apana-shubh-moolaank-ank-jyotish/jJr5Om.html


 


2 जुलाई 2020 बृहस्पतिवार,दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन


1


नए वसर प्राप्त होंगे, पर आपके प्रतिद्वंद्वी उन पर रोक भी लगाने की कोशिश कर सकते ःऎं. अपने भाई बंधुओं के साथ प्रेम बना कर रखें. अन्यथा विवाद तो बनने की पूरी आशंका है. 


2


जितना आप मेहनत करेंगे उतनी आपको अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस समय आप काफी इमोशनल भी हो सकते हैं किसी की बातें आप को दिल से छू सकती हैं. 


3


आज के दिन आप अपनी कला प्रतिभा का परिचय दे सकते हैं. कुछ मिटिंग में आपकी स्थिति बेहतर रुप से सामने आएगी. अगर आप कोई बाहरी संपर्क में आगे बढ़ना चाहते हैं तो कोशिश कर सकते हैं. 


4


आपको काफी अच्छा प्लेटफॉर्म चाहिए होगा तो इसके लिए आज आपके कोई मित्र सहायक बन सकते ःऎं. खान पान को लेकर आप थोड़े चूजी हो सकते हैं. 


5


अपना कौशल दिखाने का, किसी भी मौके को हाथ से जाने न दें. अपनी फैमली को साथ लेकर चलना आसान नहीम होगा. पर दिलों की दूरी मिटा सकते हैं. 



पिता के साथ संबंधों में मज़बूती आएगी. अपने किसी काम को लेकर आप यात्रा पर जाने का विचार करेंगे. वाहन इत्यादि का संभल कर यूज करना चाहिए. 


7


प्रोफेशन में आपकी किसी बड़े व्यक्ति से मुलाकात होगी. आज आप अपने प्रोजेक्ट को लर काफी गंभीर दिखाई देंगे. पढ़ाई के मामले में आप थोड़े कम रहने वाले हैं. 


8


किसी अपने की सलाह जीवन को नयी दिशा की ओर मोड़ सकती है. कुछ न कुछ नया करते रहें. घर पर आज आप्की जरूरत अधिक रहने वाली है. 


9


आपको प्यार के मामले में अपनी ओर से अधिक कोशिश करने की जरुरत होगी.  स्वास्थ के संबंध में यह समय मिक्स परिणाम दे सकता है. 


बुधवार, 1 जुलाई 2020

1 जुलाई 2020 बुधवार, दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन


                         कैसे ज्ञात करें अपना शुभ मूलांक-अंक ज्योतिष click the link below


https://savarkartimes.page/article/kaise-gyaat-karen-apana-shubh-moolaank-ank-jyotish/jJr5Om.html


 


1 जुलाई 2020 बुधवार दैनिक राशिफल-अपने मूलांक से जाने कैसा रहेगा आज का दिन


1


काम की अधिकता आपको परेशान कर सकती है. आज आप अपने लिए समय की कमी को झेलेंगे. जो लोग सरकारी काम काज में लगे हुए हैं उन्हें अधिक मेहनत की जरुरत होगी. 


2


आज पेट या पेट के निचले हिस्से से संबंधित दिक्कत आ सकती है. काम को लेकर बहुत अधिक परेशान नही हों स्ठिति सामान्य होगी. आज अपनी माता जी से आशीर्वाद लेकर अपने काम आरंभ करे. 


3


यह समय आपके लिए काफी शुभ न रह पाए. आपको अपने शत्रुओं से खुद को संभाल कर रखने की जरूरत होगी. रिश्तों में सामंजस्य बिठाने में आपको काफी मेहनत करनी होगी. 


4


लोगों से मदद मिलेगी, जिन व्यक्तियों को प्रेम संबंधों में चुनौती आ रही थी, उन्हें रिश्ता सुधारने के मौके भी प्राप्त हो सकते हैं. 


5


रिश्तों में आप ज्यादा सफल न हो पाएं पर आपकी ओर से किए गए प्रयास सफल हो सकते हैं. जो लोग विवाह का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें अनुकूल अवसर मिल सकते हैं. 


6


व्यवसाय अथवा प्रोफेशन में आ रही परेशानियों के हल मिलने शुरू हो सकते हैं. आपका मित्र आज आपके लिए एक बेहतर साथी बन कर उभरेगा. 


7


नए रास्ते पाने के लिए आपको मेहनत की जरूरत करनी होगी. काम के क्षेत्र में स्थिरता की ओर बढ़ेंगे, शौर्य और साहस से अनिश्चितता से बाहर आने में मदद मिल सकती है. 


8


आप के लिए जरुरी है कि अच्छे विचारों और सूचनाओं का आदान प्रदान करें. इससे लोगों को आपकी अहमियत का बोध होगा. आज आप कुछ नए लोगों से मिलेंगे. 


9


आप जितना लोगों से मिलेंगे जुलेंगे उतना आप को बढ़िया मौके मिल पाएंगे. अपनी ओर से तैयारी में कमी न होने दीजिये. संपत्ति के मसले बेहतर रुप से सामने आएंगे. 


-Rajrani Sharma, Astrologer


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