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Showing posts from December, 2019

गुरुकुल बोर्ड बनने से होगा हिंदुत्व का विकास- स्वामी बालाकानंद

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नई दिल्ली |  गुरुकुल बोर्ड बनने से होगा हिंदुत्व का विकास और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए युवा पीढ़ी को संस्कृत निष्ठ बनाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे | ये विचार गत मंगलवार को कांगड़ी विश्वविद्यालय और हिंदू महासभा के संस्थापक हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद जी  के बलिदान दिवस और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तथा हिंदू महासभा के संस्थापक पं. मदन मोहन  मालवीय जी के जन्मदिवस के अवसर पर आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर परम् पूज्य स्वामी श्री बालकानंद जी महाराज ने रखे |  कार्यक्रम "श्रेष्ठ" और भारत रक्षा मंच, युवा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ |   मुख्य अतिथि श्री सूर्यकांत केलकर जी ने कहा कि अलग अलग भाषा और खानपान के बावजूद भारत की संस्कृति एक है और दोनों महापुरूषों ने राष्ट्र और संस्कृति को बचाए रखने के लिए, सभी भारतीयों को सूत्रबद्ध करने के लिए विश्वविद्यालयों और हिंदू महासभा का गठन किया। देश की स्वतन्त्रता में इन संस्थानों का बहुत बडा योगदान है।  विशिष्ट अतिथि श्री डी. के शर्मा जी, को चेयरमैन- दिल्ली बार कोंसिल ने कहा कि दोनों महापुरूषों की सोच से ही स्वतंत्रता

द्विराष्ट्र सिद्धांत का सच : सावरकर से पहले मुस्लिम लीग ने ही द्वि राष्ट्र सिद्धांत को मानकर पाकिस्तान की मांग की थी

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     सन् 1930 में जब मुहम्मद इकबाल  ने भारत के उत्तर पश्चिमी भाग में दक्षिण एशिया के मुसलमानों के लिए एक अलग मुस्लिम राज्य के निर्माण की बात की, तभी से पाकिस्तान के निर्माण की मांग उठी | इकबाल ने कहा कि उत्तर-पश्चिम भारत का संगठित मुस्लिम राज्य के रुप में निर्माण ही मुझे मुसलमानों की अंतिम नियति प्रतीत होती है ​|      इसके बाद मुस्लिम लीग ने मुसलमानों को भड़काना शुरू कर दिया | मुस्लिम राज्य के नए नाम पाकिस्तान का नाम कैंब्रिज( इंग्लैंड) विश्वविद्यालय के कट्टर मुस्लिम छात्र चौधरी रहमत अली ने दिया |      प्रोफेसर बलराज मधोक ने अपनी पुस्तक पाकिस्तान का आदि और अंत के पृष्ठ 26 में लिखा है कि  "शब्द पाकिस्तान का सबसे पहले प्रयोग लन्दन में चौधरी रहमत अली ने किया | वहां 1930 में हुए राउंड टेबल कांफ्रेंस के समय उसने मुस्लिम लीग के नेताओं से मिलकर उन्हें भारत के उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान का एक अलग मुस्लिम राज्य बनाने की योजना बनाई | उसके अनुसार पाकिस्तान नाम में अक्षर - प पंजाब, अ - अफगानिस्तान, क - काश्मीर, स - सिंध और स्तान- बलूचिस्तान के द्योतक है " |      मुहम्मद इक़बाल

काशी की ज्ञानवापी मस्जिद प्राचीन विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा है-आचार्य मदन, अध्यक्ष विश्व हिन्दू पीठ

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      वाराणसी | "काशी की ज्ञानवापी मस्जिद प्राचीन विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा है, सरकार को चाहिए कि अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि स्थान की तरह पुरातत्व विभाग के द्वारा इस परिसर की खुदाई करायी जाए, अन्यथा हिन्दू महासभा पुनः जन आन्दोलन के द्वारा शिव भक्तों जगाएगी" यह वक्तव्य हिन्दू महासभा के प्रवक्ता और विश्व हिन्दू पीठ के अध्यक्ष आचार्य मदन ने दिया |        आगे उन्होंने कहा कि "1950 से अयोध्या में श्रीराम जन्मस्थान का विवाद कोर्ट में लटका हुआ था और सन 92 के 6 दिसम्बर को श्रीराम मंदिर का भवन यह सोचकर विध्वंश कर दिया गया कि यह बाबर का कलंक है, किन्तु पूर्व में हुई पुरातत्वीय उत्खनन और बाद के शोध से वहां मूल रूप से मंदिर होने के ही प्रमाण मिले, जिसे माननीय उच्चतम न्यायालय ने प्रमाण रूप में स्वीकार कर यह स्थान हिन्दुओं के पक्ष किया | इसी तरह हिन्दू महा सभा द्वारा मुख्य रूप से मथुरा और काशी के देवस्थानों की मुक्ति की मांग प्रारम्भ से ही रही है जब जनसंघ और भाजपा का जन्म भी नहीं हुआ था |"       इसके साथ ही विश्व हिन्दू महा संघ के राष्ट्रीय मंत्री वीर रामनाथ लूथरा ने कहा कि &

गृहस्थों के लिए आवश्यक है-दर्श पूर्णमास यज्ञ

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           यज्ञ से उत्तम कोई भी कर्म नहीं है | इसका एक अर्थ यह भी है कि जो भी उत्तम कर्म है वह यज्ञ है | वह स्वयं में एक यज्ञ है | जैसे परोपकार स्वयं में एक श्रेष्ठ कर्म है, वैसे ही यज्ञ स्वयं में एक लोकोपकार कर्म है | ऋषियों ने वेदों में वर्णित यज्ञों से अनेक प्रकार के विज्ञान को सिद्ध कर संसार को लाभ पहुंचाया | किन्तु भौतिक सुखों में गृहस्थ सुख स्वयं में पूर्ण सुख है | गृहस्थ के ही मानवीय सुखों को सिद्ध करने में दैनिक हवन की अपनी विशिष्ट भूमिका है | वैदिक काल में गुरुकुलीय शिक्षा व धर्म व्यवस्था के प्रभाव से सभी मनुष्य नित्य यज्ञ में कुछ न कुछ द्रव्य समर्पित करते थे |   गीता में भी यज्ञ से कामनाओं की पूर्ति होने की चर्चा हुई है | गीता पांच हजार साल की संस्कृति का प्रमाण है तो लगभग दो करोड़ वर्ष पूर्व रामायण काल में भी  राजा दशरथ ने श्रृंगेरी ऋषि के निर्देशन व ब्रह्मत्व में पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन किया और फिर उन्हें  चार दिव्य सन्तानें प्राप्त हुई |    शतपथ ब्राह्मण ग्रन्थ में अग्न्याधान और अग्नि चयन से सम्बंधित अनेक रहस्यों को उद्घाटित किया है | अग्निपुराण में तथा उपनिषदों में वर्