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गोचर में ग्रहों की भूमिका को जाने बिना भविष्यवाणी अधूरी रहती है-ज्योतिष मंथन

   


    यदि आप जन्म कुण्डली के अनुसार चल रही शुभ- अशुभ ग्रहों की दशाओं के फलादेश पर विचार कर रहे हैं तो ग्रहों के गोचर से संबंधित तथ्यों को जाने |


 


     किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों का गोचर एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाता है. एक व्यक्ति के जीवन में होने वाली घटनाओं और घटनाओं को निर्धारित करने में भी गोचर महत्वपूर्ण भूमिका होती है. व्यक्ति की जन्म कुण्डली में किसी ग्रह की महादशा, अंतरदशा अवधि के दौरान, यदि गोचर अनुकूल हो, तो जातक को वह परिणाम प्राप्त कर सकता है जो उसके जीवन को बदल सकता है. 


 


इस लिए ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में मौजूद दशा ओर अंतरदशा के अतिरिक्त गोचर को भी बहुत महत्व दिया जाता है. सही भविष्यवाणी का संचार करने के लिए, यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि कौन सा गोचर  शुभ है और कौन सा अशुभ है. 


 


आइए ग्रहों के गोचर से जुड़े कुछ बुनियादी तथ्यों पर एक नज़र डालें।


 



जब शनि जन्मकालीन सूर्य के ऊपर से गोचर करता है, तो जातक को ग्रहों के कारक तत्वों से संबंधित बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. 


 


जब बृहस्पति जन्मकालीन सूर्य के ऊपर से गोचर करता है और लग्न पर दृष्टि डालता है, तो उस समय के दौरान व्यक्ति को अपने कार्यस्थल पर उच्च आधिकारिक से प्रश्म्सा एवं या उच्च स्थिति प्राप्त हो सकती है. यह समय व्यक्ति की आय के अच्छे अवसरों को भी प्रदान करने में सहायक बनता है.


 



   जब गोचर में बृहस्पति जन्म लग्न के बुध के साथ हो या बुध की राशि में गोचर कर रहा हो तो उस स्थिति में जातक की आर्थिक स्थिति स्थिर होती है.पर उसके साथ लोगों के वैचारिक मतभेद अधिक हो सकते हैं. 


 


गोचर का बृहस्पति जब जन्म कुंडली के दूसरे या ग्यारहवें भाव को प्रभावित करता है तो यह वित्तीय दृष्टि से यह स्थिति  मजबूती प्रदान करने वाली होती है. इस समय पर व्यक्ति वाणी से संबंधित लाभ भी पाता है. उसकी तर्कशीलता को बेहतर बल मिलता है. 


 


जन्म कुण्डली के शुक्र पर से बृहस्पति का गोचर होना रिश्तों के लिहाज से बदलाव लाने वाला होता है.  इस गोचर का प्रभाव प्रेम संबधों को नए आयाम देने वाला होता है. शुक्र के लग्न पर बृहस्पति का गोचर वैवाहिक संबंधों के आरंभ की सुगबुगाहट को भी दर्शाने में बहुत सहायक बन सकता है. 


 


अपनी दशा में ग्रह के माध्यम से बृहस्पति का गोचर अत्यधिक शुभ परिणाम देने में भी सहायक बनता है. जन्म लग्न या कुण्डली के पंचम भाव पर बृहस्पति का गोचर हो तो यह व्यक्ति के जीवन में किसी के आगमन की सूचना देने वाला होता है. 


 


जब शनि और बृहस्पति का गोचर एक साथ कुंडली में सूर्य को प्रभावित करता है, तो  व्यक्ति को अपने काम के स्थान पर बदलाव और उच्च स्थान प्राप्त हो सकता है. व्यक्ति के कमाई के साधन भी बदल सकते हैं.  आय में वृद्धि हो सकती है. कुछ मामलों में व्यक्ति को तबादले का सामना करना पड़ सकता है. 


 


जब कुंडली के चौथे घर में शनि का गोचर होना व्यक्ति को उसके सुख स्थान से हटाने का कम करता है. यह वो समय होता है जब जातक अपने मन में सकुन की कमी पाता है. किसी न किसी कण से उसे अपने निवास स्थान को भी बदलना पड़ सकता है. अगर शनि और बुध का गोचर एक साथ होता है, तो व्यक्ति का निवास स्थान बदल जाता है.


ग्रह गोचर महत्व 


ग्रहों का गोचर व्यक्ति को कैसा फल देगा इसका आधार व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बनने वाले योग, दशा ग्रह फल, गोचर इत्यादि पर निर्भर करता है.  कुण्डली में बनने वाले योग जितने मजबूत हो, फल उतनी ही गति से प्राप्त हो पाएगा. ग्रहों का गोचर  दशा ओर योग की पूर्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला होता है.