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Showing posts from March, 2020

श्री बलदेव मंदिर-जम्मू काश्मीर का अकेला विष्णु शेषावतार का मंदिर-जिसके दर्शन मात्र से ही हो जाता है कालसर्प दोष का निवारण 

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जम्मू के पंजतीर्थी क्षेत्र में स्थित 'श्री बलदेव जी मंदिर' का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है | जम्मू काश्मीर राज्य में  लगभग एक हजार से ऊपर हिन्दू देवी-देवताओं के पौराणिक काल के मंदिर आज भी अस्तित्व में है, किन्तु जम्मू शहर में तवी नदी के ठीक किनारे धौंथली डक्की में भगवान विष्णु के शेष अवातर हलधर श्रीबलराम का अकेला मंदिर में आज भी श्रद्धालु आते हैं | इस मंदिर में ऐसी मान्यता है कि यहाँ भगवान बलराम-देवी रेवती के आशीर्वाद से भक्त अपने मनोनुकूल जीवन साथी प्राप्त करते हैं |    लगभग दो सौ वर्ष पूर्व महाराजा श्रीरणजीत के शासन काल में अनेकों मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ | जम्मू के इस ऐतिहासिक श्रीबलदेव मंदिर का भी पुनर्निमाण किया | डोगरा शासन काल में इस पंजतीर्थी (पञ्च तीर्थ ) अनेक मंदिरों को उनके वैभव काल के समान जागृत किया गया | तवी नदी को सूर्य पुत्री भी कहा जाता है | इस कारण भी इस पंजतीर्थी की महिमा है |       श्रीबलराम के एक हाथ में हल रहता है जो कृषि कर्म का प्रतीक है, और दुसरे हाथ में मूसल है, जो दुष्टों के संहार के लिए है | श्रीशेषावतार के इस लीला रूप के कारण बहुत ही पूजन

जम्मू का हिन्दू इतिहास -5000 साल पुराने सुध महादेव मंदिर में स्थापित है शिव का अजेय त्रिशूल-वीरेन्द्र बांगुरु

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     इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला व संस्कृति के जम्मू-काश्मीर व लद्दाख राज्य के निदेशक वीरेन्द्र बांगुरु का दावा है कि  जम्मू उधमपुर की  पटनीटॉप पर्वत के पास सुध महादेव(शुद्ध महादेव) के मंदिर में प्रतिष्ठित 12 फीट ऊँचा त्रिशूल वैदिक कालीन भारतीय धातु विज्ञान की उत्कृष्ट धरोहर है | यह मंदिर शिवजी के इसी एक त्रिशूल के कारण देश-विदेश के सैलानियों का आकर्षक का केंद्र बन गया है |      श्री वीरेन्द्र बांगुरु ने बताया कि इस त्रिशूल पर ब्राह्मी लिपि में शिव तंत्र के कुछ सूत्र टंकित किये है, जो धातु पर लेखन कार्य की प्राचीन कला का परिचय कराते हैं | इसी तरह का एक और त्रिशूल उत्तराखंड के उत्तरकाशी खंड में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थापित है | काशी विश्वनाथ के इस पुरातन त्रिशूल की लम्बाई लगभग 23 फीट है |   प्राकृतिक आपदा के मामले में जम्मू क्षेत्र के मंदिर आज भी अपने हजारों साल के इतिहास को समेटे हुए हैं | सुध महादेव के त्रिशूल में लगा लौह में जंग नहीं लगता | हालांकि इसके अब तीन टुकड़े हो चुके हैं, किन्तु ऐसी दन्त कथा है कि  भगवान शिव के इस त्रिशूल में दिव्य शक्ति का वास है, इसमें