अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि पर मध्यस्थता पैनल एक धोखा है -आचार्य मदन

नई दिल्ली. विश्व हिन्दू पीठ के अध्यक्ष आचार्य मदन ने अयोध्या श्री राम जन्मभूमि पर मध्यस्था पैनल को लेकर कहा कि "यह हिन्दुओं के साथ एक बहुत बड़ा छलावा है, सुप्रीम कोर्ट को अब तक प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय दे देना चाहिए | हिन्दू महासभा और निर्मोही अखाड़ा पिछले सात दशकों से अयोध्या में श्री राममंदिर के लिए न्यायालीय में लड़ रहे हैं | केवल लोकसभा चुनाव में हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को लाभ पहुचाया है | अब तक यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चूका है कि ध्यस्थता में कोई खास प्रगति नहीं हुई | यह मामले को लटकाने के लिए और भाजपा सरकार को थोडा राजनीतिक लाभ देने के लिए प्रयोग हुआ है  |"


इससे पहले 18 जुलाई को मध्यस्थता पैनल ने कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी। तब सीजेआई ने कहा था कि अभी मध्यस्थता की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर नहीं लिया जा रहा, क्योंकि ये गोपनीय है। पैनल जल्द अंतिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दे। अगर इसमें कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो हम 2 अगस्त को रोजाना सुनवाई पर विचार करेंगे। उसी दिन सुनवाई को लेकर आगे के मुद्दों और दस्तावेजों के अनुवाद की खामियों को चिन्हित की जाएंगी।


मध्यस्थता पैनल से नहीं मिल रहे सकारात्मकर परिणाम
इससे पहले याचिकाकर्ता ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। इसलिए कोर्ट को जल्द फैसले के लिए रोज सुनवाई पर विचार करना चाहिए। इस पर कोर्ट ने कहा था कि मध्यस्थता पैनल की स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद ही तय करेंगे कि अयोध्या मामले की सुनवाई रोजाना की जाए या नहीं। अयोध्या विवाद में पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की याचिका और जल्द सुनवाई का निर्मोही अखाड़ा ने भी समर्थन किया। अखाड़ा ने कहा था कि मध्यस्थता प्रकिया सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। इससे पहले अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में था


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