आखिर क्यों हमारे शंकराचार्य BJP, RSS , VHP आदि का विरोध करते है ?

 


शंकराचार्य क्या हैं पहले यह भी समझने का प्रयास करना चाहिए और


यह आप तबतक नही समझ पाओगे जब तक आप bjp-rss के चंगुल में हो


अन्ध चमचे आवेश में आकर हमारे पूज्य शंकराचार्यो को कांग्रेसी भी कह देते है
कभी यह भी समझने का प्रयास कीजिये आखिर शंकराचार्यों को संघ से दूरी क्यों बनानी पड़ती है ?
आकलन करो कोई तो समस्या होगी ही आरएसएस में ?


शास्त्रों का विरोध,
परम्पराओं का विरोध,
धार्मिक मर्यादाओं का विरोध
सामाजिक मर्यादाओं का विरोध,
वर्ण व्यवस्था का विरोध,
विधर्मियो का साथ,


तो शंकराचार्य क्यों करेंगे समर्थन ?


और यदि स्वरूपानंद सरस्वती जी कांग्रेसी हैं तो अन्य दो पीठ शंकराचार्य कभी बीजेपी के पक्ष में क्यों नही बोलते ...क्या वे भी कांग्रेसी हैं ?


और ऊपर से आप हिन्दू सम्मेलन करोगे उसमे शंकराचार्य से ऊपर दलाई लामा को बिठाओगे तो कोई शंकराचार्य क्यों देगा आपको समर्थंन?


अब यह प्रकरण ध्यान से पढ़िए...


एक बार चारों शंकराचार्यों को विहिप ने निमन्त्रण दिया अपनी एक धर्म सभा में जो कि विहिप द्वारा आयोजित एक धर्म मंच था ... वाराणसी या प्रयाग में ।


और उस धर्म मंच का मुख्य वक्ता बनाया गया दलाई लामा को । वह दलाई लामा जो बौद्धों के वामपंथी पन्थ का प्रमुख है दक्षिणपंथ का भी नही ।
और वह बौद्ध मत जिसको समाप्त करने में आदिगुरु शंकराचार्य जी ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया ।


पूज्य शंकराचार्यों को दूरभाष द्वारा सूचित किया गया ...औपचारिकता पूरी हो गई, उन्हें बताया नही गया कि बौद्ध दलाई लामा मंच की अध्यक्षता करेगा।


परन्तु जब प्रिंटेड निमन्त्रण पत्र पहुंचा तो सभी शंकराचार्यों को अपमान महसूस हुआ, ततपश्चात
सभी शंकराचार्यों ने आपस में वार्तालाप कर आपसी सहमति से विहिप के धर्म-मंच में न जाने का निर्णय लिया


कोई भी शंकराचार्य नही गए और सबने boycott कर दिया।
RSS-VHP ने इज्जत बचाने हेतु चार नकली शंकराचार्यों को बिठा लिया ।


और फिर आरएसएस ने अब तक कोई 50 से अधिक नकली शंकराचार्य खड़े किये ।



वाजपेयी भी एक बार एक नकली शंकराचार्य को अमेरिका लेकर गया और सबको कहता फिरता था कि ये पूरी के शंकराचार्य हैं ।


आप स्वयं विचार करें...


इस्लामी आक्रांताओं ने कभी प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य परम्परा के साथ टकराव नही किया जबकि नागा अखाड़े हिन्दू राजाओं की और से युद्धों में भाग लेते थे तब भी ।


अंग्रेजों ने स्वयं कभी शंकराचार्य परम्परा से छेड़छाड़ नहीं की ।


कांग्रेस ने कभी शंकराचार्य परम्परा से छेड़छाड़ नही की ।


परन्तु अपनी दूकान का एकछत्र राज स्थापित करने हेतु ...आज संघ द्वारा स्थापित देश में लगभग 150 से अधिक नकली स्वयंभू शंकराचार्य हैं ।


आश्चर्य तो तब होता है जब संघ का एक वरिष्ठ बुजुर्ग कसाई साईं बाबा प्रकरण में शंकराचार्य को धर्म के विषयों में हस्तक्षेप न करने का बयान दे डालता है।


स्वयं पीएम वाजपेयी एक नकली शंकराचार्य को अमेरिका लेकर जाते हैं और उनका पूरी पीठ के शंकराचार्य के रूप में परिचय करवाते हैं सबसे ...जबकि उसी यात्रा की एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में एक पत्रकार ने पूछ लिया था कि पूरी पीठ के शंकराचार्य निश्छलानंद तो इस समय भारत में ही हैं ।
और एक दण्डी स्वामी को विदेश यात्रा सदैव निषेध रहती हैं।


जुलाई 2014 में पूरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी दिल्ली पधारे, मोहन भागवत उनसे मिलने पहुंचे ।


निश्चलानंद सरस्वती जी ने स्पष्ट कहा कि आपने हमारे सामने 150 नकली शंकराचार्य खड़े किये हैं... यदि हमने 4 मोहन भागवत खड़े कर दिए तो संघ नही चला पाओगे ।


यही है इनका हिंदुत्व


फिर भला क्यो कोई भी शंकराचार्य आरएसएस बीजेपी का साथ दे ?


बताइये ?