पाक अधिकृत कश्मीर से माँ सरस्वती की पुकार-जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानन्द




जम्मू और काश्मीर | काश्मीर की पौराणिक महत्व की ऐतिहासिक श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, आज पाकितान के कब्जे में हैं | जिसे मुक्त कराने के लिए काशी विद्वत परिषद् और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानन्द जी महाराज द्वारा  वर्ष 2003 से देश व्यापी अभियान चलाया जा रहा है | वर्तमान मोदी सरकार द्वारा 370 हटाने के बाद यह आशा जागृत हुई है कि माँ शारदा के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आस्थावान हिन्दू शीघ्र ही वहां जा सकेंगे |      


     काश्मीर में डोगरा शासन तक हिन्दू प्रतिवर्ष वसंत पंचमी और नवरात्र में माँ सरस्वती की वंदना करते रहे , लेकिन उस श्री सर्वज्ञ शारदा पीठ को भूल गए हैं, आज उसके भग्नावशेष ही बचे हैं |




     आज से ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य ने दक्षिण से इस पावन तीर्थ में आकर माँ सरस्वती के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया था |  उसके उपरान्त ही माँ शारदा के श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ मंदिर का दक्षिणी द्वार खोल दिया गया | 


  आदि शंकराचार्य और कश्मीर; शैव सनातन ... आदि शंकर श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ पर विराजमान हुए |  माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर शंकर की कीर्ति चारों ओर फ़ैल गई, वे जगद्गुरु शंकराचार्य कहलाने लगे | आदि शंकराचार्य ने माँ सरस्वती की वंदना में स्तुति की रचना की जो आज प्रत्येक भक्त की वाणी को पवित्र करती है-


नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुर वासिनी, त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे


  श्री सर्वज्ञ शारदा पीठ  देवी के 18 महाशक्ति पीठों में से एक है | दुर्भाग्य से आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हिन्दुओं को जाने की अनुमति नहीं है | 


    एक समय ऐसा भी था जब पंजाब के आस्थावान हिन्दू व कश्मीरी पंडित ही नहीं, अपितु पूरे भारत से लोग तीर्थाटन करने आते थे | विशेष रूप से गया व हरिद्वार से भी अधिक श्रद्धालु पितृ तर्पण के लिए यहाँ कृष्ण गंगा तीर्थ पर आते थे |  


    Displaced Hindus Commence Annual Pilgrimage for the Reopening of ...  राजा कनिष्क के राज में यह समूचे एशिया का सबसे बड़ा ज्ञान का केंद्र शारदा विश्वविद्यालय था, जहाँ सर्व दर्शन व अध्यात्म पर विशेष पाठशालाएं चलती थी | वस्तुतः कश्मीर की ख्याति ही ‘शारदा प्रदेश’ के नाम से थी | एक विदेशी लेखक महाशय  लेवलिन बैशम ने अपनी पुस्तक ‘वंडर दैट वाज़ इण्डिया’ में लिखा है कि बच्चे अपने उपनयन संस्कार के समय ‘कश्मीरं गच्छामि’ कहते थे जिसका अर्थ था कि अब वे उच्च शिक्षा हेतु कश्मीर जाने वाले हैं | 


 आचार्य अभिनवगुप्त ने लिखा है कि कश्मीर में स्थान-स्थान पर ऋषियों की कुटियाँ थीं और पग-पग पर भगवान शिव का वास था |


Historical temple of Goddess Sharda at Kashmir Neelum Valley ...     

   

      शारदा पीठ का उल्लेख नीलमत पुराण में भी मिलता है|  इसके अतिरिक्त कल्हण ने राजतरंगिणी में लिखा है कि सम्राट ललितादित्य के समय में शारदा विश्वविद्यालय में बंगाल के गौड़ समुदाय के लोग शारदा पीठ आते थे | शारदा विश्वविद्यालय में ही देवनागरी से भिन्न शारदा लिपि का जन्म हुआ था | 

ऐसा माना जाता है कि वाग्देवी सरस्वती ने कश्मीरी लिपि शारदा को इसी प्रकार प्रकट किया हो |


पाक अधिकृत कश्मीर में माँ सरस्वती का ...


    काश्मीर की इसी पवित्र भूमि पर महर्षि पाणिनी, महर्षि पतंजलि, आयुर्वेद के महर्षि चरक,वाग्भट्ट आदि दिव्य विभूतियों का जन्म हुआ | यहीं पर पाणिनी अष्टाध्यायी, पतंजलि योग सूत्र, अष्टाङ्ग योग हृदयम चरक संहिता, अभिनव गुप्त की तंत्रालोक, विष्णु शर्मा का पंचतंत्र, शारंगदेव की संगीत रत्नाकर, कथासरित्सागर, शिव पुराण आदि सनातन कालजयी ग्रन्थों की रचना हुई | 


     सनातन वैदिक हिन्दू संस्कृति का हृदय यह श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ आज पाक अधिकृत कश्मीर में खंडहर के रूप में रहते हुए भी अपनी गौरवशाली जगद्गुरू परम्परा के प्रतीक के रूप में विद्यमान है |  श्री सर्वज्ञ शारदा पीठ कश्मीर ही सभी शांकर पीठों/मठों का मूल है और सभी शांकर पीठों/मठों में आदि शंकराचार्य जी ने शारदा भगवती की ही प्रतिष्ठा की थी, इसीलिए दक्षिण में श्रृंगेरी को भी शारदा पीठ कहते हैं, तो पश्चिम में द्वारका को भी शारदा पीठ के नाम से जाना जाता है |
     पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है ऐसी घोषणा करते हुए भारतीय संसद ने इस भूभाग को वापस लेने के लिए दो संसदीय प्रस्ताव पास किये जिन्हें अबतक क्रियान्वित नहीं किया जा सका है, अतः इसके कार्यान्वयन को गति व दिशा देने के लिए एक धार्मिक नेतृत्व देने के उद्देश्य से काशी के विद्वत जनों द्वारा वैशाख शुक्ल पूर्णिमा ,संवत 2060 (16 मई 2003) को भारत के सुविख्यात तरुण तपस्वी स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ महाभाग को श्री शारदा सर्वज्ञ पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य  के रूप में प्रतिष्ठित किया गया |


   सनातन धर्म के इस पावन तीर्थ के उद्धार के लिए -श्रीमद् जगद्गुरू शारदा सर्वज्ञ पीठम्, न्यास,


से जुड़ने के लिए सम्पर्क करें | आपके अमूल्य योगदान से हम श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त करा के इस सनातन तीर्थ के पुनरुद्धार के महाभियान में सफल होंगे |


दिल्ली प्रशासनिक कार्यालय -


श्रीमद् जगद्गुरू शारदा सर्वज्ञ पीठम्, न्यास,


  D-50, खसरा-257,


SSN MARG (100 फीट रोड),


छत्तरपुर एन्क्लेव, 
नई दिल्ली-110074, दूरभाष - 94516-94641


आखिर क्या था अमृतानन्द का मिशन | Webdunia ...Sarvagya Sharda Peeth


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