शनिवार, 30 नवंबर 2019

गोडसेवादी साध्वी प्रज्ञा पर दबाव डालकर गांधीवादी बनाया जा रहा है -आचार्य मदन

 


नई दिल्ली | 30 नवम्बर | "देश में गोडसे को देशभक्त मानने वालों की संख्या बढती जा रही है, गांधी हत्याकांड केस पर पुनः एक विशेष जांच समिति का गठन होना चाहिए, भले ही संसद में गोडसे के नाम लेने पर हंगामा उठ खड़ा होता हो, किन्तु हिन्दू जनता अब गोडसे को समर्थन कर रही है और भाजपा नेतृत्व गोडसेवादी और प्रखर हिन्दू राष्ट्रवादी साध्वी प्रज्ञा पर दबाव डालकर गांधीवादी बना रही है, यह विचारों की अभिव्यक्ति का दमन है"-यह वक्तव्य विश्व हिन्दू पीठ के अध्यक्ष आचार्य मदन ने दिया |


     


         आचार्य मदन ने कहा कि संसद में गोडसे पर चर्चा तक नहीं होती है ! यह नेहरु राज के समय की तानाशाही आज तक चल रही है | पं नाथूराम गोडसे ने गाँधी वध किया उसके बाद वे भागे नहीं अपितु शान्ति से अपनी गिरफ्तारी दी | आखिर सारे देश को जानने का हक़ है कि कौन से ऐसे कारण बन गए थे जिनके कारण गोडसे को पत्रकारिता त्याग कर हिंसा का मार्ग अपनाना पड़ा | अदालत में गोडसे ने वो सभी कारण गिनाए जिसके कारण मोहन दास गांधी की हत्या करने के लिए वो विवश हुए | गांधी देश सेवा करते-करते देश का विभाजन कर गए, यह बात किसी भी स्वतंत्रता सेनानी के लिए बहुत बड़ा आघात था | विभाजन से पूर्व लाहौर पंजाब सिंध के हिन्दुओं को गाँधी ने आश्वासन दिया कि विभाजन उनकी लाश पर बनेगा, किन्तु गाँधी नेहरु ने मिलकर भारत के टुकड़े-टुकड़े कर दिया | मुस्लिम लीग लाखों हिन्दुओं की हत्याओं के बाद भारत के पश्चिम और पूर्व में इस्लामिक स्टेट स्थापित करने में कामयाब हो गया और हम हिन्दू इस खंडित भारत में सेकुलर होकर रह गए |


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       फिर काश्मीर पर पाकिस्तान के आक्रमण के काल में भारतीय सेना के साथ विश्वासघात करते हुए 55 करोड़ रूपये की धन राशि पाकिस्तान पहुंचाने का जो भयंकर राजद्रोह किया उसके लिए गांधी को उचित दंड मिलना चाहिए | काश्मीर पर पाकसेना का जबरन कब्ज़ा होने पर नेहरु मंत्रिमंडल की ओर से 55 करोड़ रूपये देने पर वित्त मंत्री ने आधिकारिक रोक लगा दी थी | किन्तु गांधी मुस्लिम तुष्टिकरण की राह में अंधे होकर कार्य कर रहे थे, गांधी ने जबरदस्ती अनशन पर बैठकर पाकिस्तान की सहायता की | यदि पाकिस्तान को वह धन राशि प्राप्त नहीं होती तो भारतीय सेना काश्मीर को पूर्णतः पाक के कब्जे से मुक्त करा लेती और वह युद्ध एक वर्ष से अधिक भी नहीं चलता | गांधी के इसी पाक प्रेम को देखकर गोडसे को उन्हें यमलोक पहुँचाने का विचार आया |


     विभाजन के 72 साल बाद भी भारत इस्लामिक आतंकवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण का अखाड़ा बन चूका है | किसी भी राजनीतिक पार्टी में विशुद्ध राष्ट्रवाद और हिन्दू राष्ट्र की मूल भावना के अनुरूप आचरण नहीं रहा है | तथाकथित हिंदूवादी दलों द्वारा जोड़ तोड़ कर सत्ता हासिल करने के उपरान्त भी इस राष्ट्र में हिन्दू हित का भविष्य खतरे में होता जाए तो यह बेहद चिंताजनक है |


      Image result for साध्वी प्रज्ञा ठाकुर गोडसे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल में लोकसभा चुनावी सभा में पं नाथूराम गोडसे को सच्चा देशभक्त कहा था, जिस पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व और संघ के अधिकारियों ने अपनी असहमति दिखाई | किन्तु देश में गांधी और गांधीवाद के प्रति जनता का मोह भंग हो चूका है, सोशल मीडिया और गोडसे के साहित्य से गोडसे के प्रति लोगों की जिज्ञासा शांत हुई, परिणाम में साध्वी प्रज्ञा ने कांग्रेस के दिग्विजय सिंह को रिकॉर्ड मत से हराया | जनता कांग्रेस व उनके गांधी और उनके  तथाकथित गांधी परिवार की विचारधारा को नकार चुकी है | भाजपा व संघ अतीत के गांधीवाद के मोह से मुक्त होने चाहिए | देश को स्वतंत्र कराने में सशस्त्र क्रांतिकारी वीरों के प्रमुख योगदान है | गांधी को राष्ट्रपिता कहना भारत के अखंड भारत के बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी आत्माओं का अपमान है | 


   देश को आजादी चरखे के कारण नहीं मिली देश की जनता अनेकानेक जन आन्दोलनों में शासन के डंडो व यातनाओं को झेल कर इस निष्कर्ष पर पहुंची चुकी है कि अहिंसा से आजादी नहीं मिलती !


  देखिए शिव सेना के २००4 में सामना अख़बार में छपे सम्पादकीय लेख पर मचे हंगामे पर लाइव डिबेट जिसमें शिवसेना पं नाथूराम गोडसे को महान देशभक्त बताया था | क्या कांग्रेस से मिलकर भी गोडसेवाद जिन्दा रहेगा ? क्या भाजपा भी इतने लम्बे समय से शिव सेना के साथ रही तो शिवसेना के गोडसेवाद पर कभी स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया ?



 


 


रविवार, 24 नवंबर 2019

जब युधिष्ठिर स्वर्ग पहुचे तो ये देख कर हैरान रह गए...

        Image result for युधिष्ठिर का स्वर्गारोहणमहर्षि वेद व्यास जी ने  महा भारत के अन्त में स्वर्गारोहण अध्याय में युधिष्ठिर द्वारा इन्द्रप्रस्थ हस्तिनापुर राज्य के त्याग के पश्चात् हिमालय गमन का उल्लेख किया है |  जब युधिष्ठिर पैदल ही अपने चारों एक भाईयों और द्रोपदी को लेकर बद्रीनाथ से आगे अलका पूरी हिमालय में बढ़ने लगे, तब उन हिम श्रृंखला में द्रोपदी सहित एक-एक करके चारों भाई भूमि पर गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुए | 
    Image result for युधिष्ठिर का स्वर्गारोहण केवल एक कुत्ता जीवित रहा जो पांडवों के नगर से निकलते ही उनके साथ-साथ चल रहा था | यात्रा के अंतिम पड़ाव में युधिष्ठिर के साथ स्वामी भक्त वह कुत्ता ही रहा | दुर्गम पर्वतों को पार करके वे हिमालय के सप्त रोहिणी शिखर पर जा पहुंचे |  फिर युधिष्ठिर स्वर्गारोहण का संकल्प किया तो स्वयं इन्द्र प्रकट हुए | फिर  एक तार्किक व रोचक वार्तालाप के उपरांत इंद्र ने युधिष्ठिर और उस कुत्ते को अपने रथ में बैठाया और स्वर्ग में प्रवेश कर गए  |


         इंद्र के विशेष तेज से युक्त धर्मराज युधिष्ठिर सशरीर ही स्वर्ग में पहुंचे | वहां देवताओं ने उनका स्वागत सत्कार किया |  युधिष्ठिर ने देखा कि वहां दुष्ट दुर्योधन एक दिव्य सिंहासन पर बैठ कर आनंद कर रहा है, अन्य कोई वहां नहीं है | यह देखकर युधिष्ठिर ने देवताओं से कहा कि मेरे भाई तथा द्रौपदी जिस गति को प्राप्त हुए हैं, मैं भी उसी लोक में जाना चाहता हूं, मुझे उनसे अधिक उत्तम लोक की कामना नहीं है | तब देवताओं ने कहा कि यदि आपकी ऐसी ही इच्छा है तो आप इस देवदूत के साथ चले जाइए | यह आपको आपके भाइयों के पास पहुंचा देगा | युधिष्ठिर उस देवदूत के साथ चले गए |


देवदूत युधिष्ठिर को ऐसे मार्ग पर ले गया, जो बहुत खराब था |


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     बहुत ही दुर्गन्ध भरे उस मार्ग पर घोर अंधकार था | किन्तु आसपास भयानक रूप वाली आत्माएं दिखाई दे रही रही | कहीं मुर्दे पड़े हुए थे | लोहे की चोंच वाले कौए और गिद्ध मंडरा रहे थे | देव दूत ने बताया कि यह असिपत्र नामक नरक हैं | वहां शवों की दुर्गंध से तंग आकर युधिष्ठिर ने देवदूत से पूछा कि हमें इस मार्ग पर और कितनी दूर चलना है और मेरे भाई कहां हैं? युधिष्ठिर की बात सुनकर देवदूत बोला कि देवताओं ने कहा था कि जब आप थक जाएं तो आपको तुरंत ही लौटा लाऊ | यदि आप थक गए हों तो हम पुन: लौट चलते हैं |  युधिष्ठिर ने सहमती दी |
    जब युधिष्ठिर वापस लौटने लगे तो उन्हें दुखी लोगों की आवाज सुनाई दी, वे युधिष्ठिर से कुछ देर वहीं रुकने के लिए कह रहे थे | युधिष्ठिर ने जब उनसे उनका परिचय पूछा तो उन्होंने कर्ण, भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव व द्रौपदी के रूप में अपना परिचय दिया | युधिष्ठिर ने कुछ चिंतन किया, फिर  उस देवदूत से कहा कि तुम पुन: देवताओं के पास लौट जाओ, मेरे यहां रहने से यदि मेरे भाइयों को सुख मिलता है तो मैं इस नरक पर ही रहूंगा | देवदूत ने यह बात जाकर देवराज इंद्र को बता दी |


     युधिष्ठिर को उस स्थान पर अभी कुछ ही समय बीता था कि मार्ग पर प्रकाश छा गया |  सभी देवता वहां आ गए | देवताओं के आते ही वहां सुगंधित हवा चलने लगी |


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    तब देवराज इंद्र ने युधिष्ठिर को बताया कि तुमने अश्वत्थामा के मरने की बात कहकर छल से द्रोणाचार्य को उनके पुत्र की मृत्यु का विश्वास दिलाया था | इसी के परिणाम स्वरूप तुम्हें भी छल से ही कुछ देर नरक के दर्शन पड़े | अब तुम मेरे साथ स्वर्ग चलो | वहां तुम्हारे भाई व धर्म युद्ध में प्राण उत्सर्ग करने वाले  अनेक वीर पहले ही पहुंच गए हैं |
 
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     वेद व्यास जी महाभारत का उपसंहार पांडवों के स्वर्गारोहण के साथ किया | एक मत के अनुसार यह अंतिम भाग काल्पनिक है. ऊपर आकाश में या अन्यत्र कहीं भी स्वर्ग नरक नहीं है | सभी जीवों को अपने कर्मों का हिसाब किताब इसी धरती में जन्म लेकर ही भोगना पड़ता है. स्वर्ग नरक की अवधारणा सभी पंथों में चलती है | मृत्यु उपरान्त स्वर्ग नरक में गति की कथाएँ चलाने के पीछे ऋषियों मुनियों का अभिप्राय यही हो सकता है कि मनुष्य अपने कर्मों के प्रति स्वयं ही सचेत रहे |
हमारी आत्मिक चेतना व संचित कर्मों के अभिलेख
    विचार से कर्म और कर्म से पुनः विचार की एक श्रृंखला हमारे चित्त का हिस्सा बन जाती है | चित्त के दो स्तर है - एक सूक्ष्म शरीर मन, बुद्धि और अहंकार के साथ हमारे आज्ञा चक्र के प्राण तल से जुड़ा रहता है, ये चित्त स्वयं में एक शरीर है, एक जीवन की योजना के रूप में अवतरित है | दूसरा सहस्रार चक्र के व्योम आकाश से परे हिरण्यगर्भ चित्रगुप्त पुरुष के समष्टि प्राण शरीर के आकाशिक अभिलेखों में कहीं होता है |


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       यहाँ जो चित्त है वह अद्भुत ज्ञान कोष का भण्डार है. विराट स्मृतियों को समेटे हुए है | भावी जन्मों की धुंधली छाया को छिपाए हुए है | पूरा का पूरा संचित कर्मों का लेखा जोखा इसी आकाशिक अभिलेखों की चित्त स्मृति में है |
जो जीवन हमें मिला है वह प्रारब्ध है. जीवन में अनायास आने वाले जय-पराजय, सुख-दुःख, मान-अपमान, हानि-लाभ, मिलना-बिछुड़ना और खोना-पाना ये प्रारब्ध और क्रियमाण कर्मों का परिणाम हो सकता है, इसके ऊपर हमारी भौतिक चेतना सक्रिय रहती है, परन्तु जो समष्टि आकाश में छिपा है उस 'संचित चित्त' के पीछे आत्मिक चेतना का वास है | 
यदि उस आत्मिक चेतना के तल पर हम पहुँच जाए और ध्यान दें तो पाएंगें कि हम अपने इस जीवन को साक्षी भाव से देख में सक्षम होने लगे हैं | इस साक्षी भाव में हमारा यह जीवन हमें एक पहले से लिखी हुई कहानी की तरह लगने लगेगा | ऐसा भी लगता है कि यह सब हम पहले भी अनुभव कर चुके हैं, क्योंकि हमारी आत्मिक चेतना संचित चित्त की योजनाओं को पहले से ही जानती है | परन्तु नए जीवन के भोग में हम भूल जाते हैं, हम मायावी प्रभाव से इस जीवन को सबकुछ मान लेते हैं |
    संचित कर्मफलों के भण्डार 'चित्त' से एक जीवन  के लिए प्रबल इच्छाओं के अनुरूप कर्मफल के अनुसार प्रारब्ध अर्थात् भाग्य का निर्धारण होता है | यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन में हर घटना पूर्व निर्धारित नहीं होती, कुछ नए क्रियमाण कर्म और विशेष भक्ति, तप-दान व सिद्ध महापुरुषों के आशीर्वाद से वो सब कामनाएं भी पूर्ण हो जाती है, जो भाग्य में नहीं होती. परन्तु मनुष्य जीवन का उद्देश्य भौतिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं है, अपितु आत्मा की चैतन्य शक्ति का विस्तार करना है. जन्म-जन्मान्तर के प्रयासों से हम बहुत थोड़ी से आध्यात्मिक उन्नति कर पाते है | योग-मार्ग से भटककर फिर संसार के प्रपंच में उलझे हुए जीवन के बहुमूल्य समय को नष्ट कर देते हैं |  जो हर जन्म में होता है, वैसा इस बार ऐसा न हो, आत्मा जाग कर फिर से ना सो जाए, इसलिए उठ जाग मुसाफ़िर भोर भई ! अब रैन कहां जो सोवत है....
अध्यात्म की दिशा में कदम रखने वालों को निश्चित ही दैवीय सहायता प्राप्त होती है | 


 महा कुण्डलिनी


आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित ईशोपनिषद् के संस्कृत भाषा अनुवाद का हिंदी रूपान्तर सुने 



मंगलवार, 19 नवंबर 2019

अयोध्या तो क्या भारत के किसी भी तीर्थ में बाबर या बाबरी के नाम से मस्जिद नहीं होनी चाहिए- शंकराचार्य अमृतानन्द देव तीर्थ

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय में मुसलामानों को पांच एकड़ भूमि अयोध्या में ही दिए जाने को लेकर संतों व हिन्दू धर्माचार्यो में आक्रोश है | शारदा सर्वज्ञ पीठ, काश्मीर के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अमृतानंद देव तीर्थ ने कहा, "उच्चतम न्यायालय में रामजन्म स्थान पर कभी भी मस्जिद होने के प्रमाण नहीं मिले तो ऐसे में न्याय पीठ द्वारा विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए पांच एकड़ भूमि बाबरी मस्जिद के लिए देना एक ऐतिहासिक भूल साबित होगी | बाबर एक विदेशी लूटेरा था, उसने अपने भारत आक्रमण काल में हिन्दुओं के तीर्थों को लूटा, इसलिए उसके नाम से अयोध्या में मस्जिद बने यह भविष्य में घातक परिणाम लेकर आएगा | हम अयोध्या को मक्का नहीं बनने देंगे "


       जगद्गुरु अमृतानन्द जी ने आगे कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को रिव्यु करने की याचिका डालने का निर्णय किया है वह देश के मुसलमानों में भ्रम पैदा करने का षड्यंत्र हैं, इससे जेहादी मुस्लमान भड़केगा | निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट को अपने लगभग एक हजार पेज के निर्णय के महत्वपूर्ण बिन्दुओं को सार रूप में स्पष्ट करना चाहिए, जिससे भारत में जेहादी ताकतें श्रीराम मंदिर के निर्माण में बाधक ना बने | 


 ज्ञात हो की पूरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद देव तीर्थ जी ने अयोध्या में मुसलमानों को पांच एकड़ भूमि दिए जाने को महा विनाशकारी कदम बताया | उन्होंने अपने एक विडियो में बताया कि भारत के स्वतंत्र होने पर हिन्दुओं को पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिली | विदेशी आक्रान्ताओं के प्रतीक चिन्ह या स्मृति स्थलों को जड़मूल से हटाना सनातन धर्मी हिन्दुओं का मानव अधिकार है | देखिये पूरा विडियो जिसमें उन्होंने दावा किया कि अयोध्या तीर्थ पूरी पीठ के संविधान क्षेत्र में आता है |



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जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने भी इसी महाशक्ति पीठ- शारदा सर्वज्ञ पीठ से प्रेरणा प्राप्त की थी

 नमस्ते शारदे देवि, काश्मीरपुर वासिनी,  त्वामहं प्रार्थये नित्यं, विद्यादानं च देहि मे  श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ-काश्मीर का इतिहास  प्राक्कथन ...